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प्रतापगढः तीन लाख से अधिक अपात्र किसानों का किसान सम्मान निधि में फर्जीवाड़ा करके किया गया 60 करोड़ का खेल, विभागीय जांच में खुला खेल तो डीएम के निर्देश पर दर्ज हुआ मुकदमा


प्रतापगढ़/कुंडा। किसानों के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में ऐसा खेल सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की पूरी कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। 3 लाख 18 हजार 846 किसानों के पंजीकरण से जुड़े इस मामले में 60 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी धनराशि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। तहसील स्तर के सरकारी लॉगिन का इस्तेमाल कर डायरेक्ट एंट्री के जरिए बड़ी संख्या में ऐसे लोगों का पंजीकरण कराया गया, जो योजना के पात्र नहीं थे। पहले विभागीय स्तर पर जांच कराई गई और जांच में मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर साइबर थाना प्रतापगढ़ में एफआईआर दर्ज कराई गई।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में किसानों के पंजीकरण की सामान्य प्रक्रिया तय है। किसान स्वयं अथवा जनसेवा केंद्र के माध्यम से पंजीकरण कराता है, जिसके बाद आवेदन संबंधित तहसील से जनपद, राज्य और फिर भारत सरकार के स्तर तक सत्यापन के लिए जाता है। सामान्य प्रक्रिया से पंजीकरण नहीं हो पाने वाले किसानों के लिए तहसील स्तर के लॉगिन पर डायरेक्ट एंट्री की सुविधा दी गई थी। जांच में सामने आया कि इसी सुविधा का दुरुपयोग कर तहसील कुंडा की आईडीध्लॉगिन से बड़े पैमाने पर पंजीकरण कराए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि पंजीकरण की इस प्रक्रिया में अपात्र व्यक्तियों, नाबालिग बच्चों तथा जनपद और प्रदेश से बाहर के लोगों के नाम भी शामिल किए गए। यानी किसान सम्मान निधि जैसी योजना, जिसका लाभ पात्र किसानों को पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर पूरी व्यवस्था बनाई गई थी, उसी व्यवस्था में सेंध लगाकर बड़ी संख्या में नाम पोर्टल पर चढ़ा दिए गए।

विभागीय जांच में मामला सामने आने के बाद इसकी गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी स्तर से प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। इसके बाद साइबर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। जांच में 318846 किसानों के नाम से करीब 60 करोड़ रुपये से अधिक की शासकीय धनराशि के दुरुपयोग की बात सामने आई है। मामला सामने आने के बाद भारत सरकार ने भी पोर्टल से तहसील स्तर पर उपलब्ध डायरेक्ट एंट्री का विकल्प तत्काल प्रभाव से हटा दिया।

अब जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि 3,18,846 पंजीकरणों में कितने किसान वास्तव में पात्र थे और कितने नाम नियमों को दरकिनार कर दर्ज कराए गए। साथ ही सरकारी लॉगिन का इस्तेमाल किस स्तर से हुआ और इतनी बड़ी संख्या में पंजीकरण कराने के पीछे कौन लोग शामिल थे? मुकदमा दर्ज होने के बाद कार्यवाही का असर उन किसानों पर भी पड़ेगा जो अपात्र होकर इस योजना का लाभ लें रहें थें। इस संबंध में एसपी प्रतापगढ़ दीपक भूकर का कहना है कि मुकदमा दर्ज करके आवश्यक विधिक कार्यवाही राजपत्रित अधिकारी की निगरानी में शुरू कर दी गई है।

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