25 दिन में फिर गया मंत्री पद, फंड गड़बड़ी के आरोपों में बी. नागेंद्र का इस्तीफा
August 29, 2026
कर्नाटक सरकार में मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. राज्य की एक कल्याणकारी संस्था के फंड में कथित गड़बड़ी के मामले को लेकर विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था. हालांकि, नागेंद्र ने साफ कहा कि उन्होंने विपक्ष के दबाव में इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि कांग्रेस को किसी तरह की असहज स्थिति से बचाने के लिए खुद यह फैसला लिया है. खास बात यह है कि नागेंद्र को 3 अगस्त को कैबिनेट विस्तार के दौरान दोबारा मंत्री बनाया गया था और उन्होंने महज 25 दिन बाद पद छोड़ दिया.
बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नागेंद्र भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के कारण नहीं है. वह कांग्रेस पार्टी को किसी तरह की परेशानी या असहज स्थिति में नहीं डालना चाहते, इसलिए पद छोड़ रहे हैं. बल्लारी ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से विधायक नागेंद्र इससे पहले आदिवासी कल्याण मंत्री थे. वर्ष 2024 में कर्नाटक की एक सरकारी कल्याण संस्था के फंड में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था. इसके बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 3 अगस्त को कैबिनेट विस्तार के दौरान उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया था.
दिल्ली से लौटने के बाद नागेंद्र ने कांग्रेस नेतृत्व से विधायक पद से भी इस्तीफा देने की अनुमति मांगी. उन्होंने कहा कि वह अपने खिलाफ आरोप लगाने वालों का सामना करना चाहते हैं और अपना नाम साफ करना चाहते हैं. नागेंद्र के मीडिया से बातचीत करने के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से भी उनकी मुलाकात हुई. शिवकुमार ने बताया कि नागेंद्र ने उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला लेने से पहले वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा करेंगे. शिवकुमार ने यह भी कहा कि नागेंद्र पर लगाए गए आरोपों में वह निर्दोष हैं.
चार बार के विधायक नागेंद्र को शिवकुमार ने योजना और सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी थी. इस्तीफे के दौरान नागेंद्र ने कहा कि उनके फैसले को भारतीय जनता पार्टी (BJP) या जनता दल (सेक्युलर) यानी JDS के दबाव के आगे झुकना नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने विपक्षी दलों के लिए ‘मनुवादी’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यह फैसला उन्होंने अपनी इच्छा से लिया है, क्योंकि वह कांग्रेस को असहज स्थिति में नहीं डालना चाहते. नागेंद्र ने कहा कि वह राज्य की अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित 15 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे और लोगों को बताएंगे कि कैसे BJP और JDS ने एक झूठ को बार-बार दोहराकर उसे सच साबित करने की कोशिश की.
BJP और JDS ने नागेंद्र के खिलाफ कथित फंड गड़बड़ी के मामले को लेकर मानसून विधानसभा सत्र के दौरान सरकार पर दबाव बढ़ाया था. दोनों दलों ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग करते हुए विधानसभा की कार्यवाही भी बाधित की थी. विपक्ष का आरोप है कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम (KMVSTDC) के करीब 89 करोड़ रुपये के फंड में कथित गड़बड़ी हुई थी. BJP ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर 1 सितंबर से रायचूर से बल्लारी तक 10 दिन की पदयात्रा निकालने का ऐलान किया था. पार्टी ने कहा है कि नागेंद्र के इस्तीफे के बाद भी पदयात्रा जारी रहेगी, क्योंकि वर्ष 2024 के इस मामले से जुड़े अन्य मुद्दे भी हैं.
इस्तीफा देने के बाद नागेंद्र ने BJP पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह बीआर आंबेडकर के संविधान का दौर है, पुराणों का नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि BJP की ‘मनुस्मृति वाली सोच’ यह है कि दलित, महिलाएं, अल्पसंख्यक और आदिवासी आगे न बढ़ें. नागेंद्र ने कहा कि वह ऐसा होने नहीं देंगे.
नागेंद्र ने दावा किया कि राज्य सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) और अपराध जांच विभाग (CID) ने उन्हें मामले में क्लीन चिट दी है. उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुरुआत में अपनी जांच में उनका नाम शामिल नहीं किया था. हालांकि, दूसरी बार कैबिनेट में शामिल किए जाने के बाद ED ने उनका नाम जांच में जोड़ा. इस पूरे घटनाक्रम के बीच नागेंद्र के मंत्री पद से इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस नेतृत्व के फैसले पर नजर है. मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के बाद आगे का निर्णय लेंगे.
