राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर रात भर पुलिस की छापेमारी
July 09, 2026
राम मंदिर के दानपात्र से धन चोरी के मामले में पुलिस रिमांड पर लिए गए अभियुक्तों से पूछताछ में जांच टीम को बड़ी सफलता मिली है। अयोध्या पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, अभियुक्तों की निशानदेही पर देर रात कई स्थानों पर छापेमारी कर पुलिस ने नकदी, सोने के आभूषण और एक चार पहिया वाहन बरामद किया है। आरोपी अनुकल्प के कब्जे से 20 हजार रुपये नकद, सोने की चेन, एक मोबाइल फोनऔक उसके पिता के नाम से खरीदी गई डिजायर कार बरामद कर कब्जे में ले ली गई है।
वहीं आरोपी लवकुश द्वारा अपनी पत्नी को उपहार में दिया गया सोने का लॉकेट भी बरामद कर लिया गया है। इसके अलावा उसके पास से 38 हजार रुपये नकद भी बरामद हुए हैं। आरोपी करुणेश के पास से 15 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में विभिन्न खातों से हुए लेनदेन के भी पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग खातों से अपने खातों में धन मंगाकर चोरी के पैसे को वैध दिखाने की कोशिश कर रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक चंदा चोरी के खुलासे और 8 गिरफ्तारियों के बाद कोई भी नया आउटसोर्स कैशियर अपॉइंट नहीं किया गया है। महाकुंभ के दौरान भीड़ बढ़ने के बाद ट्रस्ट ने आउटसोर्स कंपनी के जरिए भर्ती की थी। इसमें हाउस कीपिंग स्टाफ था। इसको बैंक के सूत्र भी मानते हैं। सूत्रों के मुताबिक जो भर्तियां हुई थी, उसमें कोई स्पेसिफिक क्वालिफाइड स्टाफ की जरूरत नहीं थी क्योकि ये आउटसोर्स कैशियर्स का काम पैसे गिनने का नहीं था।
सूत्रों के मुताबिक सभी आउटसोर्स लोग, नोट को सीधा करना, उनकी गड्डियो को तरीके से अलग-अलग लगाना था। दान पात्र में जैसे नोट को मोड़कर डालते है उनको सीधा करना और लगाना इनका काम था। नोट गिनने का काम एसबीआई बैंक के लोग करते थे। इस तरह की हाईटेक मशीन थी जिसंमे मिक्स नोट जैसे 500, 100, 200 के नोट हैं। उनको मशीन में डालो तो खुद नोट अलग अलग हो जाते थे। नकली नोट कोई हो तो पहचान में आ जाता था। बैंक के सूत्रों का कहना है जो नए लड़के लगे थे। उनका काम कैश गिनना नहीं था। नोटो को सीधा करना और तरीके से रखना था
सुभाष श्रीवास्तव जो गणना दान पात्र की चीजों को मेंटेन करता था। वो भी बैंक का कर्मचारी नहीं था, पूर्व बैंकर था। एसबीआई बैंक के पूर्व मैनेजर गोविंद मिश्र जो इस वक्त लखनऊ ब्रांच में पोस्टेड हैं वो अयोध्या पुलिस की रडार पर हैं। उनसे और मंदिर में गणना करने वाले बैंक कर्मचारियों से जल्द पूछताछ हो सकती है। साथ ही अनिल मिश्रा जिन्होंने बैंक के साथ MOU साइन किए उनके भी बयान इस हफ्ते दर्ज किए जा सकते हैं। ड्रेस कोड, इंटरव्यू भर्ती करना। इन सबका काम एक अलग एजेंसी करती है। इसमें बैंक डायरेक्ट इन्वॉल्व नहीं होता।
अब सवाल ये है कि गिरफ्तार आरोपी पैसे नहीं गिनते थे, वे बस नोट को सीधा करते थे और गिनती बैंक के कर्मचारी करते थे तो जब चोरी होती थी उस वक्त ये बैंक के कर्मचारी क्या करते थे। आखिर कैसे एसबीआई बैंक के लोग को गणना रूम में मौजूद होते थे। उनको नहीं पता लगता था कि नोट गायब हो रहे हैं। ये इन्वेस्टिगेशन का पार्ट है। इसलिए ही जल्द एसबीआई बैंक के कर्मचारियों के बयान दर्ज हो सकते हैं।
