ग्रामीणों ने अधूरे काम, भुगतान और मनरेगा में गड़बड़ी के लगाए आरोप
अमेठी। विकासखंड अमेठी की ग्राम पंचायत दरखा में विकास कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतों की जांच गुरुवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी के नेतृत्व में गठित टीम ने की। जिलाधिकारी संजय चैहान ने रामहित पाल की ओर से विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ी 12 बिंदुओं की शिकायत मिलने पर 11 जून को जांच के आदेश दिए थे और 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी। जांच के दौरान ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव मौके पर नहीं पहुंचे, जिस पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि दोनों जांच से बच रहे हैं। टीम ने गांव में विभिन्न विकास कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर कार्य अधूरे मिले, जबकि कुछ कार्यों के बारे में ग्रामीणों ने बताया कि भुगतान होने के बावजूद काम नहीं कराया गया। जांच में नल मरम्मत के नाम पर धनराशि खर्च दिखाए जाने के बावजूद कार्य नहीं मिलने की बात सामने आई। स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए करीब दो लाख रुपये खर्च दर्शाए गए, लेकिन गांव में अधिकांश स्थानों पर स्ट्रीट लाइट नहीं मिली। टीम ने पंचायत भवन पहुंचकर दिव्यांग शौचालय का भी निरीक्षण किया। यहां निर्माण कार्य अधूरा मिला। कूड़ा निस्तारण केंद्र और अन्नपूर्णा भवन की भी जांच की गई। ग्रामीण धनु देवी ने आरोप लगाया कि उनके शौचालय की मरम्मत के लिए धन निकाल लिया गया, लेकिन एक वर्ष बाद भी उसे ठीक नहीं कराया गया। ग्रामीण विजय कुमार उपाध्याय, प्रमोद, संजय, बाबूराम करी, राम अचल पाल, रमेश कुमार, अमरनाथ और ललता प्रसाद समेत कई लोगों ने आरोप लगाया कि मनरेगा मजदूरी का भुगतान उनके खातों में न कर दूसरे खातों के माध्यम से धन निकाला गया। उन्होंने विकास कार्यों में व्यापक अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने बताया कि ग्राम प्रधान और सचिव को जांच के लिए पहले ही सूचना दी गई थी, लेकिन दोनों उपस्थित नहीं हुए। निरीक्षण में मिली कमियों के आधार पर उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। जांच रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को भेजी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। जांच के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और टीम के सामने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।
