लखनऊ। राजधानी के सरगम अपार्टमेंट वासियों का अनोखा विरोध प्रदर्शन आखिरकार रंग ले आया। जलभराव और कीचड़ से त्रस्त होकर निवासियों द्वारा मनाए गए श्कीचड़ महोत्सवश् और सड़क पर ही धरने पर बैठने की तपस्या के बाद सो रहा प्रशासनिक तंत्र जाग गया है। क्षेत्र के विधायक डॉ. नीरज बोरा के कड़े दखल के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आनन-फानन में सड़क निर्माण का काम तो शुरू कर दिया है, लेकिन स्थानीय निवासियों के मन से अभी भी श्खोदने और बनानेश् का पुराना डर दूर नहीं हुआ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि असली श्सस्पेंसश् तो अभी भी बना हुआ है। दरअसल, जिस सड़क को तहस-नहस कर जलकल विभाग ने पाइपलाइन डालने का काम किया था, वहां अभी तक किसी भी अपार्टमेंट को पानी का कनेक्शन नहीं दिया गया है।
निवासियों को आशंका है कि जैसे ही एलडीए इस सड़क पर डामर डालकर इसे चमचमाती हुई तैयार करेगा, वैसे ही जलकल विभाग के अधिकारी अपने पुराने ढर्रे पर चलते हुए ष्खुदाई अभियानष् का झंडा लेकर फिर से सड़क खोदने पहुंच जाएंगे।
इस पूरे मामले ने लखनऊ के दो बड़े विभागोंकृलखनऊ विकास प्राधिकरण और जलकल विभागकृके बीच आपसी तालमेल की भारी कमी को उजागर किया है। एक विभाग सड़क बनाता है और दूसरा विभाग पानी-सीवर के नाम पर उसे फिर से उजाड़ देता है। इस श्खोदो और बनाओश् के खेल में केवल जनता की गाढ़ी कमाई का टैक्स और उनका सुकून ही बर्बाद होता है।
सरगम अपार्टमेंट वासियों की मांग है कि सड़क पर डामरीकरण का काम तब तक शुरू न किया जाए जब तक जलकल विभाग सभी अपार्टमेंट्स को कनेक्शन देने का काम पूरा नहीं कर लेता तथा स्क्। और जलकल विभाग के अधिकारी आपस में बैठकर पहले रणनीति तय करें ताकि बार-बार खुदाई की नौबत न आए।
अब देखना यह होगा कि जनहित की इस जायज मांग पर दोनों विभाग आपसी तालमेल बिठाकर काम करते हैं, या फिर हमेशा की तरह जनता को एक बार फिर चमचमाती सड़क के उजड़ने का इंतजार करना पड़ेगा।
