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जीवन रक्षक दवाओं तक हर व्यक्ति की पहुंच सुनिश्चित करने पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट ! नोटिस जारी


जीवन रक्षक दवाओं तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने यह भी कहा है कि वह जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़े मामलों के तेज निपटारे के लिए देशव्यापी निर्देश जारी करेगा.

मामला केरल की एक ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित महिला की तरफ से केरल हाई कोर्ट में दायर याचिका से जुड़ा हुआ था. एर्नाकुलम की रहने वाली महिला ने जून 2022 में जीवन रक्षक दवाओं रिबोसिक्लिब और एबेमासिक्लिब की महंगी कीमत को लेकर यह याचिका दाखिल की थी. उन्होंने बताया था कि इन दवाओं पर हर महीने लगभग 1.5 लाख रुपए खर्च होते हैं. सिर्फ वही नहीं, बड़ी संख्या में मरीज हैं जो ऐसी कीमत नहीं दे सकते. 2022 के अंत में याचिकाकर्ता की मृत्यु हो गई.

महिला की मृत्यु के बाद भी हाई कोर्ट ने सुनवाई जारी रखने का फैसला लिया. महिला की तरफ से उठाए गए विषय को अहम मानते हुए हाई कोर्ट ने एक स्वतः संज्ञान केस दर्ज किया. यह केस जनवरी 2023 से लेकर अब तक 57 बार सुनवाई की लिस्ट में लगा, लेकिन मामले में कोई खास प्रगति नहीं हुई है. इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार का फैसला लिया है.

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने केरल हाई कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह अपने पास लंबित मामले की जल्द सुनवाई कर आदेश पारित करे. उन्होंने कहा कि अगर जीवन रक्षक इलाज से जुड़ी याचिका का निर्णय याचिकाकर्ता के जीवित रहते नहीं हो पाता, तो यह न्याय व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है. इसलिए, सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले को सुनेगा और देशव्यापी आदेश देगा. सुप्रीम कोर्ट इस बात पर भी विचार करेगा कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) से जुड़े मामलों पर तेज़ सुनवाई सुनिश्चित की जा सके.

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