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कन्नौज: छिबरामऊ से था तीजन बाई का गहरा नाता.......


छिबरामऊ /कन्नौज। पद्म विभूषण तीजन बाई ने अभी हाल ही में 5 जुलाई 2026 को इस नश्वर संसार से अलविदा कह दिया। वे 69 वर्ष की थीं तथा रायपुर । प्प्डै में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। वर्ष 2005 में पंडवानी शैली की इस अद्भुत गायिका का प्रथम बार नगर में आगमन हुआ था। उस समय के तत्कालीन ैच्प्ब् ड।ब्।ल् के टपबम च्तमेपकमदज स्व. सुप्रभाष चंद्र सक्सेना के अथक प्रयासों से बच्चों के मध्य इस महान कला का प्रदर्शन आवास विकास कॉलोनी के तरंग रंगमंच पर किया गया। अगले दिन विदा लेते समय स्व. शीतला देवी सक्सेना द्वारा उनको बेटी मानते हुए तिलक किया गया जिसकी वजह से तीजन बाई  भाव विह्वल हो उठीं तथा उसी दिन से उन्होंने स्व. सुप्रभाष सक्सेना जी के साथ भाई-बहन का रिश्ता निभाते हुए प्रत्येक वर्ष रक्षाबंधन पर राखी भेजी। तत्कालीन जिलाधिकारी रविकांत भटनागर द्वारा उनका विशेष सम्मान किया गया तथा उनके विशेष अनुरोध पर इस अद्भुत गायन कला का प्रदर्शन कन्नौज में भी किया गया था। तत्पश्चात उनका आगमन वर्ष 2010 में पुनः हुआ। कार्यक्रम के मध्य में एक कीड़ा उनकी आंखों में प्रवेश कर गया जिसकी वजह से तीजन बाई दर्द से कराह उठीं तथा कार्यक्रम को बीच में ही बंद करना पड़ा। वे दोनों बार नगर में स्व. सुप्रभाष चंद्र सक्सेना जी के आतिथ्य में उनके निवास पर ही रुकीं थीं।  उन्हें ठेसा तथा मक्के की रोटी बहुत भाती थी। ज्ञातव्य हो कि महाभारत की कथाओं तथा कहानियों को अपने अद्भुत गायन के ढंग से पांडवानी कला का विकास हुआ। यह पांडवानी शैली के गायन की विश्व की एकमात्र गायिका थीं। इनको वर्ष 1988 में पद्म श्री, वर्ष 2003 में पद्म भूषण तथा वर्ष 2019 में पद्म विभूषण से नवाजा गया।जे.एस. सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रबंधक तथा ैच्प्ब् ड।ब्।ल् के त्महपवदंस ब्ववतकपदंजवत हिमांशु सक्सेना द्वारा उक्त जानकारियां साझा की गई हैं।

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