क्या नींद की कमी से भी वजन बढ़ता है? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर
July 30, 2026
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की लाइफस्टाइल बहुत बिगड़ चुकी है। अक्सर काम, पढ़ाई या मोबाइल पर घंटों समय बिताने के कारण लोग अपनी नींद से समझौता कर लेते हैं। कई लोगों को लगता है कि कम सोने से शरीर ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है और इससे वजन कम होता है। लेकिन स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञों और डॉक्टर्स के मुताबिक वास्तविकता इसके बिल्कुल अलग है। पर्याप्त नींद न लेने से वजन बढ़ने का खतरा काफी बढ़ सकता है।
डॉ. अनुराग अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस फरीदाबाद का कहना है कि जब कोई व्यक्ति रोजाना 7–9 घंटे की नींद नहीं लेता, तो शरीर के हार्मोनल संतुलन पर असर पड़ता है। खासतौर पर घ्रेलिन और लेप्टिन नामक हार्मोन प्रभावित होते हैं। घ्रेलिन भूख बढ़ाने का काम करता है, जबकि लेप्टिन पेट भरने का संकेत देता है। नींद की कमी से घ्रेलिन का लेवल बढ़ जाता है और लेप्टिन कम हो जाता है, जिससे व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है और अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ खाने की इच्छा बढ़ जाती है। इसके अलावा, कम नींद लेने से शरीर में कॉर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन का लेवल भी बढ़ सकता है। ज्यादा कॉर्टिसोल शरीर में चर्बी जमा होने, खासकर पेट के आसपास फैट बढ़ने, और इंसुलिन के प्रभाव को कम करने से जुड़ा माना जाता है। यही कारण है कि लंबे समय तक नींद की कमी मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा सकती है।
डॉ. अनुराग यह भी बताते हैं कि पर्याप्त नींद न मिलने पर व्यक्ति दिनभर थका हुआ महसूस करता है। इससे शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और नियमित व्यायाम करने की इच्छा भी घट सकती है। साथ ही, देर रात तक जागने से स्नैकिंग या जंक फूड खाने की आदत बढ़ जाती है, जिससे कुल कैलोरी इनटेक बढ़ जाता है। अगर आप वजन नियंत्रित रखना चाहते हैं, तो केवल डाइट और एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि अच्छी नींद भी उतनी ही जरूरी है। रोजाना एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं, सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल न करें, कैफीन का सेवन शाम के बाद कम करें और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। यदि पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान, खर्राटे, बार-बार नींद टूटना या वजन तेजी से बढ़ने जैसी समस्याएं बनी रहती हैं, तो स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लें। अच्छी नींद न केवल वजन नियंत्रण में मदद करती है, बल्कि हृदय, मस्तिष्क और संपूर्ण स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
