लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहाँ एक ओर राजधानी लखनऊ को सुंदर, सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर उनके ही कुछ मातहत और जिम्मेदार अधिकारी इन दावों पर पानी फेरने में जुटे हैं। ताजा मामला हुसैनगंज क्षेत्र का है, जहाँ सरकारी पार्क पर कबाड़ियों ने अवैध कब्जा जमाकर उसे अपना कारोबारी अड्डा बना लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना हुसैनगंज के अंतर्गत आने वाली श्पुराना किलाश् चैकी क्षेत्र में स्थित सरकारी पार्क पर भू-माफिया और कबाड़ियों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। जिस पार्क का निर्माण स्थानीय मासूम बच्चों के खेलने-कूदने और आम जनता के टहलने के लिए किया गया था, उसे अब कबाड़ इकट्ठा करने और बेचने का माध्यम बना दिया गया है।
हाल ही में अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड से भी नगर निगम और स्थानीय पुलिस ने कोई सबक नहीं लिया है। पार्क में चारों तरफ ज्वलनशील कबाड़ का ढेर लगा हुआ है। ऐसे में यदि यहाँ कोई बड़ी आगजनी या हादसा होता है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी किसकी होगी? यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सूत्रों की मानें तो इस अवैध कब्जे के पीछे मोटी रकम की वसूली का खेल चल रहा है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस, नगर निगम के कर्मचारियों और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की शह पर ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। यही वजह है कि तमाम शिकायतों और उजागर होती कमियों के बावजूद पार्क को खाली कराने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। जनता अब सवाल उठा रही है कि क्या नगर निगम और स्थानीय पुलिस किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है, या फिर मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों का पालन कराते हुए इस पार्क को जल्द से जल्द अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाएगा?
