लद्दाख में हिमालय बचाने की पहल! केमिकल खाद पूरी तरह बैन
July 19, 2026
लद्दाख को भारत का पहला मॉडल ऑर्गेनिक क्षेत्र बनाने की दिशा में एक अहम फ़ैसला लेते हुए, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश ने पूरे इलाके में केमिकल और सिंथेटिक फर्टिलाइजर (खाद) की खरीद, वितरण, बिक्री, मार्केटिंग और इस्तेमाल पर तुरंत प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है. LG वीके सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'X' पर कहा, "यह बताते हुए खुशी हो रही है कि लद्दाख ने खेती-बाड़ी में केमिकल/सिंथेटिक फर्टिलाइज़र के इस्तेमाल और बिक्री पर सख्त रोक लगाकर पूरी तरह से ऑर्गेनिक क्षेत्र बनने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है."
LG वीके सक्सेना ने इस अहम फ़ैसले का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच को दिया. सक्सेना ने आगे कहा, "ऑर्गेनिक और पारंपरिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देने की माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की सोच से प्रेरित इस फ़ैसले का मकसद पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की सेहत में सुधार और देश भर में टिकाऊ विकास करना है."
इस अहम और निर्णायक कदम का मकसद लद्दाख को भारत का सबसे बड़ा सर्टिफाइड ऑर्गेनिक खेती वाला क्षेत्र बनाना है, साथ ही इसके बहुत नाजुक हिमालयी इकोसिस्टम को बचाना भी है. लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना के निर्देश पर लद्दाख प्रशासन की तरफ से जारी यह अहम आदेश जुलाई 2026 से तुरंत प्रभाव से लागू हो गया. 207 रेवेन्यू गांवों के पहले से ही ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के दायरे में होने के कारण, इस आदेश के लागू होने के बाद लद्दाख भारत का पहला ऑर्गेनिक क्षेत्र बनने की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. आदेश का उल्लंघन करने पर कम से कम ₹10,000 का जुर्माना लगाया जाएगा. स्थानीय खेती को मज़बूत बनाए रखने के लिए, प्रशासन ने इस रोक के साथ-साथ काफी मदद और बदलाव से जुड़ी पहल भी शुरू की हैं.
स्पेशल डेवलपमेंट पैकेज के तहत, प्रशासन ने 20,000 क्विंटल ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र खरीदे हैं, जिनमें वर्मीकम्पोस्ट, पोटाश और फॉस्फेट-युक्त ऑर्गेनिक खाद (PROM) शामिल हैं. इन वैकल्पिक ऑर्गेनिक खाद को स्थानीय किसानों को 80% की भारी सब्सिडी पर बांटा जाएगा. कोऑपरेटिव डिपार्टमेंट ने चांगथांग क्षेत्र के खानाबदोश चरवाहों से मिलने वाली "रिगपा" (स्थानीय खेत की खाद) के इस्तेमाल को भी बढ़ाया है, जिससे उनके लिए कमाई का एक वैकल्पिक ज़रिया बना है.
मिट्टी की प्राकृतिक उपजाऊ क्षमता को बचाकर और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देकर, प्रशासन का मकसद लद्दाख की अनोखी कृषि-पारिस्थितिक पहचान को सुरक्षित रखना है. साथ ही, ऑर्गेनिक कृषि उत्पादों की कीमत बढ़ाना और लद्दाखी किसानों के लिए कमाई के बेहतर मौके पैदा करना भी इसका लक्ष्य है.
