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बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा के 91वें जन्मदिन पर PM मोदी ने दी बधाई


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (6 जुलाई 2026) को 14वें दलाई लामा को उनके 91वें जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि दलाई लामा का शांति, सद्भाव और मानवता का मैसेज पूरी दुनिया के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. प्रधानमंत्री ने उनके लंबे, स्वस्थ और सुखद जीवन की कामना भी की. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि परम पावन दलाई लामा को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं. उन्होंने कहा कि शांति और सद्भाव का उनका मैसेज पूरी दुनिया के लोगों का मार्गदर्शन करता रहा है. उनकी नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति और मानव कल्याण के प्रति उनका समर्पण प्रशंसनीय है. उन्होंने दलाई लामा के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की.

दलाई लामा के जन्मदिन पर हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित दोरजे ड्रैक मठ में तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं और तिब्बती समुदाय के लोगों ने विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया. इस दौरान उनके लंबे जीवन, अच्छे स्वास्थ्य और विश्व शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए गए. बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस कार्यक्रम में शामिल हुए.

दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को तिब्बत के ताकस्टर गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था. उनका बचपन का नाम ल्हामो थोंडुप था, जिसका मतलब है इच्छा पूरी करने वाली देवी. दलाई लामा जब दो साल के थे तब उन्हें 13वें दलाई लामा का पुनर्जन्म माना गया. इसके बाद साल 1939 में उन्हें ल्हासा लाया गया और 22 फरवरी 1940 को औपचारिक रूप से तिब्बत का आध्यात्मिक प्रमुख बनाया गया. बाद में उन्हें तेनज़िन ग्यात्सो नाम दिया गया. उन्होंने 17 नवंबर 1950 को नोरबुलिंगका पैलेस में आयोजित एक समारोह में तिब्बत की पूरी जिम्मेदारी संभाली.

साल 1959 में तिब्बत में हुए विद्रोह के बाद हालात बदल गए. विद्रोह को दबाए जाने के बाद दलाई लामा को लगभग 80 हजार से अधिक तिब्बती शरणार्थियों के साथ भारत आकर शरण लेनी पड़ी. तब से वे भारत में रह रहे हैं और दुनिया भर में शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश दे रहे हैं. आज भी उनका जन्मदिन तिब्बती समुदाय और दुनियाभर में उनके अनुयायियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है. यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि तिब्बती पहचान, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का भी प्रतीक है.

हर साल सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करता है. इस साल भी दुनिया के कई देशों में उनके जन्मदिन पर कार्यक्रम हुए. हालांकि इस बार दलाई लामा सार्वजनिक समारोह में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके. उनके कार्यालय के अनुसार, जून की शुरुआत में दिल्ली में उनके बाएं घुटने का रिप्लेसमेंट ऑपरेशन हुआ था. स्वास्थ्य लाभ के बाद उनका लद्दाख जाने का कार्यक्रम तय है. पिछले साल CTA ने ईयर ऑफ कम्पैशन कैंपेन भी शुरू किया था. इस अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण, बड़े स्तर पर पौधे लगाने और तिब्बती भाषा व कल्चर को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया. इसका मकसद दलाई लामा के करुणा और मानवता के मैसेज को आने वाले जेनरेशन तक पहुंचाना है.

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