सोनम वांगचुक के अनशन का आज 20वां दिन, 9 किलो वजन घटा
July 17, 2026
सामाजिक कार्यकर्ता, स्कॉलर और इनोवेटर सोनम वांगचुक का आमरण अनशन पिछले 19 दिनों से जारी है. लगातार कई दिनों से भोजन त्यागने के कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता लगातार गहराती जा रही है. बताया जा रहा है कि इस दौरान उनका करीब 9 किलो वजन कम हो चुका है और चिकित्सकों की टीम नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है. इसी बीच देश के कई राजनीतिक नेताओं, फिल्मी कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पत्रकारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार से तत्काल संवाद शुरू करने और इस गतिरोध का समाधान निकालने की अपील की है.
कुछ दिन पहले सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया कि यदि सोनम वांगचुक का अनशन लंबे समय तक जारी रहा तो उनके जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है. अदालत से अनुरोध किया गया कि जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर उचित चिकित्सकीय देखभाल और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए. इस याचिका के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थन में आवाजें लगातार तेज होती चली गईं. अभिनेता से लेकर नेता और साहित्यकार तक अब सरकार से बातचीत की मांग उठा रहे हैं.
बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी करते हुए कहा कि पूरा देश सोनम वांगचुक को उनके कार्यों और उपलब्धियों के कारण जानता है. उनके मुताबिक एक ऐसा व्यक्ति, जिसने वर्षों तक समाज और शिक्षा के क्षेत्र में काम किया, आज कई दिनों से बिना भोजन किए सिर्फ इसलिए बैठा है, क्योंकि उसे आने वाली पीढ़ी और छात्रों के भविष्य की चिंता है.
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि उन युवाओं और छात्रों के लिए है, जिनका भविष्य दांव पर लगा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से लोग स्थिति को समझते हुए भी चुप हैं, लेकिन वह अब अपनी चुप्पी नहीं रख सकती थीं. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश और युवाओं के हित में अपनी जान की परवाह किए बिना संघर्ष कर रहा है तो उसकी बात सुनी जानी चाहिए.
सोनाक्षी ने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक खुद लोगों से अनशन खत्म करने की अपील करने के बजाय सरकार से बातचीत शुरू कराने की बात कह रहे हैं. ऐसे में सबसे जरूरी कदम यही है कि संबंधित पक्ष बातचीत की पहल करे. उन्होंने चिंता जताई कि कहीं ऐसा न हो कि बहुत देर होने के बाद सभी जागें. उन्होंने लोगों से भी अपनी आवाज उठाने और इस विषय पर संवेदनशील बनने की अपील की.
अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने X पर जारी अपने संदेश में बताया कि वह 16 जुलाई को अपने घर से एक दिन का सांकेतिक उपवास रखेंगे. उन्होंने कहा कि इस निर्णय के पीछे उनका पहला उद्देश्य सोनम वांगचुक और उनके साथियों की पीड़ा को महसूस करना है. उन्होंने कहा कि दूसरा मकसद सरकार से यह विनम्र आग्रह करना है कि वह इस पूरे मामले में संवेदनशीलता और इच्छाशक्ति दिखाते हुए संवाद की प्रक्रिया शुरू करे. उनके अनुसार संभव है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद हों, लेकिन मतभेद का समाधान बातचीत से ही निकल सकता है.
अतुल कुलकर्णी ने कहा कि उन्होंने हमेशा सरकार को कई अवसरों पर लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होते देखा है, इसलिए उन्हें विश्वास है कि इस मामले में भी संवाद का रास्ता निकलेगा. उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें भी यह उद्देश्य उचित लगता है तो वे इस संदेश को आगे बढ़ाएं और कम से कम एक दिन समाज और संवाद के नाम समर्पित करें. उनके अनुसार दर्द और उसके समाधान के बीच सबसे महत्वपूर्ण पुल संवाद ही होता है
गायक और संगीतकार विशाल ददलानी ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि वह इस समय अमेरिका दौरे पर हैं, इसलिए जंतर-मंतर नहीं पहुंच पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि वह भारत में होते तो निश्चित रूप से आंदोलन स्थल पर मौजूद रहते. उन्होंने सोनम वांगचुक के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वह देश और छात्रों के भविष्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठा रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द उनकी बात सुने और ऐसा समाधान निकाले जिससे उन्हें अपना अनशन समाप्त करना पड़े. विशाल ददलानी ने कहा कि यह किसी राजनीतिक सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं बल्कि छात्रों के अधिकार और देश के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है. इसलिए सभी पक्षों को गंभीरता से इस विषय पर आगे बढ़ना चाहिए.
अभिनेत्री आकांक्षा सिंह ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए अपने वीडियो संदेश में कहा कि उन्हें लगता है कि समाज के रूप में हम कहीं न कहीं असफल साबित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने परीक्षा संबंधी विवादों के कारण अपना जीवन खो दिया, उन्हें वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए समाज को जागरूक होना होगा. उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति पूरे समाज और देश के हित में संघर्ष कर रहा हो तो लोगों का चुप रहना कई सवाल खड़े करता है. उनके मुताबिक हम सभी चाहते हैं कि देश में पारदर्शी और ईमानदार शिक्षा व्यवस्था हो, भ्रष्टाचार समाप्त हो और छात्रों को निष्पक्ष अवसर मिलें, लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केवल इच्छा पर्याप्त नहीं है, सामूहिक प्रयास भी जरूरी हैं.
आकांक्षा सिंह ने कहा कि वह ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि सोनम वांगचुक को शक्ति, साहस और स्वस्थ रहने का आशीर्वाद मिले. साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस सकारात्मक बदलाव के लिए यह आंदोलन किया जा रहा है, वह भविष्य में अवश्य दिखाई देगा.
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने X पर जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि सोनम वांगचुक के आंदोलन का 18वां दिन पूरा होने के बावजूद सरकार की ओर से बातचीत की कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी किसी व्यक्ति ने आमरण अनशन जैसा रास्ता चुना है, उसका उद्देश्य सरकार का ध्यान किसी गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करना होता है.उन्होंने महात्मा गांधी के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध के कई तरीके होते हैं और अनशन भी उनमें से एक महत्वपूर्ण माध्यम है. ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अपने प्राणों की परवाह किए बिना लंबे समय तक अनशन पर बैठा हो तो सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए.
कपिल सिब्बल ने कहा कि अतीत में भी कई बड़े आंदोलनों के दौरान सरकारों ने बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया था. उनका कहना था कि लोकतंत्र में सरकार का दायित्व जनता की बात सुनना और समस्याओं का समाधान तलाशना है. यदि सरकार संवाद से दूरी बना ले तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय माना जाएगा. उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे मामलों ने देश के लाखों छात्रों के बीच असंतोष पैदा किया है. उनके अनुसार युवा वर्ग इसी कारण अपनी आवाज बुलंद कर रहा है. अपने बयान में उन्होंने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री पर भी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए तीखा हमला बोला तथा सरकार के कामकाज पर कई सवाल उठाए.
अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने X पर पोस्ट कर कहा कि सोनम वांगचुक लगातार जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं और हर गुजरते दिन के साथ उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि डॉक्टर नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है. उन्होंने सोनम वांगचुक को देश की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए उनसे राष्ट्रहित, छात्रों के हित और लोकतंत्र के हित में अपना अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया. उनका कहना था कि देश को उनकी आवश्यकता है और उनका जीवन किसी भी आंदोलन से अधिक महत्वपूर्ण है.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने पूर्व पर्यावरणविद् प्रोफेसर जी. डी. अग्रवाल के लंबे अनशन का भी उल्लेख किया और कहा कि उस समय भी सरकार पर संवेदनशीलता नहीं दिखाने के आरोप लगे थे. उन्होंने किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए भी सरकार के रवैये की आलोचना की. इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के हितों और केंद्र सरकार की कार्यशैली पर कई राजनीतिक आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने दोहराया कि सोनम वांगचुक का जीवन देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और उन्हें अपना अनशन समाप्त कर देना चाहिए.
हिंदी पत्रकारिता और साहित्य जगत की वरिष्ठ पत्रकार ने X पर साझा किए गए अपने वीडियो संदेश में कहा कि वह ऐसा वीडियो कभी नहीं बनाना चाहती थीं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने उन्हें बोलने के लिए मजबूर कर दिया. उन्होंने कहा कि देश के एक सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् को अपने सिद्धांतों के लिए इस स्तर तक संघर्ष करना पड़ रहा है कि उनकी जान पर बन आए, यह बेहद दुखद स्थिति है. उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार सोनम वांगचुक का लगभग 9 किलो वजन कम हो चुका है और उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार गंभीर आशंकाएं जताई जा रही हैं. इसके बावजूद यदि बातचीत की पहल नहीं होती तो यह चिंता का विषय है.
पत्रकार ने कहा कि लोकतंत्र में किसी नागरिक की आवाज को अनसुना करना उचित नहीं माना जा सकता. यदि लोग सच बोलने या किसी मुद्दे पर अपनी राय रखने से डरने लगें तो यह समाज के लिए अच्छा संकेत नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि केवल सोशल मीडिया पर दूसरों से सवाल पूछने के बजाय हर व्यक्ति को स्वयं भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए. वरिष्ठ पत्रकार ने NEET परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए वर्षों तक मेहनत करते हैं. यदि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो इसका सीधा असर करोड़ों परिवारों की उम्मीदों पर पड़ता है.
पत्रकार ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि किसी मंत्री या जिम्मेदार व्यक्ति पर इतने गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो जवाबदेही तय होनी चाहिए. उनके अनुसार केवल चुप रहना समाधान नहीं है. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि उनके पास अपनी बात रखने का अवसर है तो उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज अवश्य उठानी चाहिए.
बता दें कि सोनम वांगचुक का अनशन अब 20वें दिन में पहुंच चुका है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस दौरान उनका लगभग 9 किलो वजन कम हो गया है और चिकित्सक लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं. उधर, सोशल मीडिया पर समर्थन का दायरा लगातार बढ़ रहा हैपिछले कुछ दिनों के दौरान X और इंस्टाग्राम पर विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां के लगातार पोस्ट और वीडियो सामने आ रहे हैं. फिल्म जगत, राजनीति, सामाजिक संगठनों और पत्रकारिता से जुड़े कई लोग अपने-अपने तरीके से इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. सरकार से शीघ्र बातचीत शुरू कर इस गतिरोध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील कर रही हैं. वहीं लोगों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए सरकार से जल्द संवाद शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है.
