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बंगाल में अभिषेक बनर्जी के दफ्तर पर चला बुलडोजर! लॉकेट चटर्जी बोलीं- पिछले 15 सालों के दौरान तृणमूल कांग्रेस सरकार के शासन में कई अनियमितताएं हुईं


तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर प्रशासन की तरफ से की गई कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश महासचिव लॉकेट चटर्जी ने इस कार्रवाई का सपोर्ट किया है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के खिलाफ सरकार की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.

लॉकेट चटर्जी ने शनिवार (19 जुलाई 2026) को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पिछले 15 सालों के दौरान तृणमूल कांग्रेस सरकार के शासन में कई अनियमितताएं हुईं, लेकिन अब ऐसी चीजों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जहां भी भ्रष्टाचार या अवैध निर्माण मिलेगा, वहां प्रशासन नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगा और गैर-कानूनी ढांचों को हटाया जाएगा.

अधिकारियों के अनुसार, अमतला में स्थित अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया. कार्रवाई के दौरान डायमंड हार्बर पुलिस जिले के बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो.

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि चुनावी नतीजे आने के बाद से यह ऑफिस बंद पड़ा था. अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने कथित अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया था. हालांकि तय समय के भीतर ऑफिस की ओर से कोई प्रतिनिधि जिला परिषद के सामने उपस्थित नहीं हुआ. इसके बाद प्रशासन ने सरकारी नियमों के तहत आगे की कार्रवाई शुरू की और परिसर खाली कराने की प्रक्रिया अपनाई. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंच गए और पूरे घटनाक्रम को देखने के लिए भीड़ जमा हो गई. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार निगरानी करती रही और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई.

इससे पहले 3 जुलाई को अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया था कि उनके ऑफिस और उनसे जुड़े लोगों को राजनीतिक कारणों से परेशान किया जा रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि उनके कार्यालय या उनसे जुड़े करीब 25 लोगों को बिना उचित नोटिस के पूछताछ के लिए बुलाया गया या हिरासत में लिया गया. उन्होंने कहा था कि इन लोगों पर उनके खिलाफ झूठे बयान देने का दबाव बनाया जा रहा है. साथ ही उन्होंने फोन टैपिंग, परिवार के सदस्यों को परेशान करने और महिलाओं को भी धमकाने जैसे आरोप लगाए थे.

अभिषेक बनर्जी ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक प्रताड़ना करार दिया था. वहीं प्रशासन और भाजपा का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की जा रही है और इसका मकसद केवल अवैध निर्माण और अनियमितताओं पर रोक लगाना है. फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की संभावना है.

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