सोनभद्र। जिले में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम विस्तृत ज्ञापन भेजकर वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि शासन के निर्देशों और वन संरक्षण नियमों की अनदेखी करते हुए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान के लिए एनोसी दी जा रही है, जिससे पर्यावरण और आदिवासी समुदाय के अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है।वर्ष 2024 के शासनादेश का हवाला देते हुए कहा कि पेड़ों की कटान के लिए तय नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि संरक्षित पेड़ों को भी काटा जा रहा है और संबंधित अधिकारी प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से लापरवाही बरत रहे हैं। प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के लिए वन क्षेत्र और हरित संपदा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने तथा अवैध कटान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
इधर, ग्रामीणों ने भी कंपनी स्थापना के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। कन्हैया चेरो ने कहा कि "किसी भी कीमत पर कंपनी नहीं लगने दी जाएगी। जरूरत पड़ी तो जिला मुख्यालय से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। चाहे इसके लिए जान ही क्यों न चली जाए।" बिंदु अगरिया ने आरोप लगाया कि "कंपनी आने से केवल प्रदूषण फैलेगा और गरीबों के जंगल, जमीन और प्राकृतिक अधिकार छिन जाएंगे। इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे जान की बाजी ही क्यों न लगानी पड़े।"राम बहाल ने कहा कि "हमारे पूर्वजों से जुड़े जंगल और पेड़ हमारी पहचान हैं। जान चली जाएगी, लेकिन कंपनी नहीं लगने देंगे। जंगल हमारी विरासत है और इसकी रक्षा हर हाल में करेंगे।"रामसेवक ने कहा कि "कोरोना काल में इस क्षेत्र की स्वच्छ हवा और वनस्पतियों ने लोगों को राहत दी थी। आने वाले समय में शहरों के लोग ऐसी हरियाली के लिए तरसेंगे। इसलिए यहां कंपनी स्थापित नहीं होने दी जाएगी।" संगठन का दावा है कि यह आंदोलन गांव से लेकर जिला मुख्यालय, लखनऊ और दिल्ली तक चलाया जाएगा। आज के कार्यक्रम में विन्दू खरवार गोपीनाथ चेरो मुखलाल चेरो गुलाब चेरो बासमती गोण दीपक गोण दिनेश माझि गुलाब बैगा राजेस पनिका व हजारों आदिवासी महिला पुरुष उपस्थित रहे।
