लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जलभराव और सीवर की समस्या इस कदर विकराल हो चुकी है कि अब आम जनता के साथ-साथ सूबे के उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) भी इससे अछूते नहीं रहे। ताजा मामला डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास का है, जहाँ सीवर और नालों का गंदा पानी भर रहा है। इस घोर लापरवाही को लेकर नगर आयुक्त से लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई है।
अभी मानसून की ठीक से शुरुआत भी नहीं हुई है, लेकिन उससे पहले ही जिम्मेदार कार्यदायी संस्था श्सूएज श् और जलकल विभाग की तैयारियों की पोल पट्टी खुलकर सामने आ गई है। हर साल सीवर और बड़े नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का भारी-बरकम बजट जारी किया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।बड़ा सवाल यह कि जब करोड़ों रुपये का बजट पास होने के बाद भी वीवीआईपी इलाकों और सरकारी आवासों का यह हाल है, तो शहर की आम जनता भगवान भरोसे किस तरह जी रही होगी? स्थानीय लोगों और आंकड़ों की मानें तो यह कोई पहली बार नहीं है। हर साल बारिश के मौसम में सीवर जाम और चोक नालों की वजह से लखनऊ के कई पॉश और सरकारी आवास तालाब में तब्दील हो जाते हैं। सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि डिप्टी सीएम के आवास में गंदा पानी भरने की इस गंभीर शिकायत के बाद नगर निगम और जलकल विभाग के कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या नहीं।
