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लखनऊः बलरामपुर अस्पताल में योग दिवस की धूमरू फेफड़ों को मजबूत करने से लेकर मानसिक तनाव दूर करने तक, डॉक्टरों ने बताए योग के चमत्कारी लाभ


लखनऊ। राजधानी के प्रतिष्ठित बलरामपुर चिकित्सालय में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को भव्य योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत सरकार द्वारा निर्धारित कॉमन योग प्रोटोकॉल के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में चिकित्सालय के वरिष्ठ अधिकारियों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और छात्र-छात्राओं ने पूरे हर्षोल्लास के साथ प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन और निर्देशन योग विशेषज्ञ डॉ. नन्दलाल यादव श्जिज्ञासुश् द्वारा किया गया।

योगाभ्यास सत्र के समापन के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए चिकित्सालय के निदेशक डॉ. विवेक गुप्ता ने कहा कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में योग की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज पूरी दुनिया ने भारतीय योग पद्धति का लोहा माना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि योग को दिनचर्या में शामिल कर लिया जाए, तो कई गंभीर बीमारियों को शरीर में पनपने से पहले ही रोका जा सकता है।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बाल्यावस्था से ही योग संस्कार डालने पर बल दिया। उन्होंने कहा, ष्यदि बच्चों को बचपन से ही योग का अभ्यास कराया जाए, तो न केवल उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) में अद्भुत वृद्धि होती है, बल्कि उनका सर्वांगीण मानसिक और शारीरिक विकास भी सुनिश्चित होता है।ष्

अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने वर्तमान जीवनशैली में बढ़ रहे मानसिक विकारों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज का युवा वर्ग मानसिक तनाव, चिंता (एंजायटी) और अवसाद (डिप्रेशन) का तेजी से शिकार हो रहा है। ऐसे में प्रतिदिन मात्र एक घंटे का योगाभ्यास मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। डॉ. श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि बलरामपुर चिकित्सालय के आयुष विभाग में प्रतिदिन नियमित रूप से चिकित्सकीय योगाभ्यास कराया जाता है, जिसका लाभ मानसिक व अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज उठा सकते हैं।

कार्यक्रम में मौजूद पल्मोनोलॉजिस्ट (श्वसन रोग विशेषज्ञ) डॉ. आनंद कुमार गुप्ता ने फेफड़ों के स्वास्थ्य को लेकर बेहद महत्वपूर्ण चिकित्सकीय परामर्श दिए। उन्होंने बताया कि श्वसन तंत्र को मजबूत करने और अस्थमा जैसी बीमारियों के प्रबंधन में योग बेहद प्रभावी है। उनके अनुसार भुजंगासन, उष्ट्रासन, उत्तान मंडूकासन और धनुरासन फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं। नाड़ी शोधन, कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम के नियमित अभ्यास से सांस संबंधी रोगों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलता है।

इस भव्य आयोजन में चिकित्सालय के डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, नर्सिंग स्टाफ, मिनिस्ट्रियल स्टाफ, स्कूल ऑफ नर्सिंग के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और सुरक्षाकर्मियों सहित सैकड़ों कर्मचारियों ने एक साथ कदम से कदम मिलाकर योगाभ्यास किया और समाज को निरोगी रहने का संदेश दिया।

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