यूपी के आमों पर संकट! जापान और अमेरिका ने क्यों किया इसे लेने से इन्कार
June 17, 2026
मलिहाबाद के मशहूर आम के बागबान और व्यापारी इस बार परेशान हैं। जापान ने कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से आम लेने से माना कर दिया है। इतना ही नहीं किसानों का आम अमेरिका भी नही ले रहा है। खाड़ी और यूरोपीय देशों में भी आम का निर्यात होना मुश्किल हो गया है। अमेरिका और ईरान युद्ध की वजह से असर आम के निर्यात पर पड़ा है। किराया ज्यादा होने की वजह से व्यापारी वहां आम नहीं भेज पा रहे हैं। साथ में मार्च के मौसम में उतार चढ़ाव, बारिश और ओलों ने आम का साइज और शक्ल दोनों ही खराब कर दिया है। इससे आम के निर्यात में दिक्कत आ रही है। किसानों का कहना है कि बेमौसम बारिश के बाद आमों को कीड़ों से बचाने के लिए ज्यादा कीटनाशक का इस्तेमाल हुआ है।
मलिहाबाद के माल इलाके में बिशन पाल सिंह का 15 बीघे में आम के बाग हैं। बिशन पाल पिछले बीस साल से अमेरिका और जापान आम एक्सपोर्ट कर रहे हैं। बिशन ने 8-8 लाख रुपये तक का आम जापान भेजे हैं। पिछले साल करीब तीन लाख रुपये का आम जापान भेजा था। इस बार भी बिशन ने पूरे साल आम जापान और अमेरिका भेजने की तैयारी की। आम जब डाल पर बहुत छोटा था उस पर खास तरह का पैकेट चढ़ाया। हर आम पर अलग अलग पैकेट चढ़ाए गए, ताकि आम में स्प्रे किया जाने वाले कीटनाशक ना जा पाए। पैकेट बांधने के लिए अलग से लेबर लगाया। उम्मीद थी कि अच्छा पैसा मिलेगा लेकिन जापान अमेरिका ने आम लेने से ही मना कर दिया। जो आम जापान में डेढ़ सौ रुपये भेजते थे, अब लोकल मंडी में 28 से 35 रुपये बेचना पड़ रहा है।
मलिहाबाद में 80 साल के कलीमुल्ला खान को आमो पर काम करने के लिए पद्मश्री मिला है। कलीमुल्ला का कहना है कि आमों में जहरीले कीटनाशक छिड़के जा रहे हैं, जो बहुत नुकसान करते हैं। बाजार में नकली कीटनाशक मिल रहे है। जिन्हें किसान छिड़क रहे हैं।जापान में खाने पीने की चीजों पर बहुत ध्यान रखा जाता है। इसलिए वो आम नही ले रहा, लेकिन हमारे देश में सभी आमों में खतरनाक कीटनाशक है।
जापान ने तो आम लेने से मना कर दिया है, लेकिन मलिहाबाद की मंडी में आम धड़ल्ले से बिक रहा है। आम के आढ़ती कहते हैं कि बिना कीटनाशक स्प्रे किए आम पैदा नहीं हो सकता। सभी फलों और सब्जियों में कीटनाशक है तो आम में भी हैं। जापान पहले भी 80 के दशक में आम में फ्रूट फ्लाई की वजह से भारत से आम के निर्यात पर बैन लगाया था। फिर आम में ट्रीटमेंट के तरीके बदले गए और 2006 में जापान को भारत ने फिर आम भेजने शुरू किए। अब बीस साल बाद फिर जापान ने भारत का आम लेने से मना कर दिया है।
लखनऊ के मालिहाबाद इलाके में आम निर्यात के लिए पैक हाउस बना है। पैक हाउस के मैनेजर सचिन ने बताया कि जापान भेजने के पहले आम का ट्रीटमेंट किया जाता है। आमों का वेयर हीट ट्रीटमेंट(VHT) किया जाता है। इससे आम के कीड़े खत्म हो जाते हैं, उनसे कीटनाशक का असर खत्म हो जाता है। पिछले दिनों जापान की टीम भारत आई और मालिहाबाद, महाराष्ट्र और देश के दूसरे हिस्सों में लगे प्लांट्स को देखने गई। टीम को प्रक्रिया में खामी मिली, जिनके बाद जापान ने आम लेने से मना कर दिया। इस ट्रीटमेंट में आमों को गर्म हवा के चेम्बर में कुछ समय के लिए रखा जाता है, जिनसे फल के अंदर कीड़े और लार्वा खत्म हो जाए और कीटनाशक का असर खत्म हो जाता है।
भारत आम का बड़ा उत्पादक है। भारत में दुनिया के कुल उत्पादन का 40 से 45 फीसदी आम होता है। यूपी में करीब 2.8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम के बाग हैं। जिसमें हर साल लगभग सत्तर लाख मीट्रिक टन आम होता है। इसमें लखनऊ के माल, मलिहाबाद और काकोरी बेल्ट का बड़ा हिस्सा है। आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में करीब 30 हजार टन आमों का निर्यात किया गया। जापान के अलावा UAE, अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत और कतर आम भेजे गए। जापान भी हर साल दो हजार मीट्रिक टन तक आम भेजा जाता है। अब आम पैदा करने वाले डरे हैं कि दुनिया के दूसरे देश भी भारत से आम लेना न बंद कर दें।
