पीलीभीत। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से गुरुवार को गांधी स्टेडियम प्रेक्षागृह में जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी, तिलहन मेला एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकास खंडों से पहुंचे सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया और कृषि विशेषज्ञों से खेती को अधिक लाभकारी बनाने के गुर सीखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने की। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेती को आत्मनिर्भर और कम लागत वाली बनाने के लिए प्राकृतिक कृषि को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि किसान रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करते हुए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बढ़ाएं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
स्वामी प्रवक्तानंद ने किसानों से प्रत्येक परिवार में कम से कम एक गाय पालने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गाय केवल दूध का स्रोत नहीं है बल्कि उसका गोबर और गौमूत्र भी खेती के लिए अमूल्य संसाधन हैं। इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च कम होता है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत-2047 का जो संकल्प लिया गया है, उसकी सफलता में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। गांव और किसान मजबूत होंगे तो देश भी विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
कार्यक्रम में जिले भर से आए करीब 600 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। कृषि, उद्यान, पशुपालन, गन्ना, मत्स्य, रेशम और सिंचाई विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल किसानों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। यहां नई फसल प्रजातियों, आधुनिक कृषि तकनीकों और विभागीय योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई।
किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर खेती से जुड़ी समस्याओं और संभावनाओं पर चर्चा की। निजी कंपनियों ने भी अपने उत्पादों और कृषि उपकरणों का प्रदर्शन किया।
प्रगतिशील कृषक संजय कुमार उपाध्याय ने किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि एक गाय से प्राप्त गोबर और गौमूत्र का उपयोग कर बड़े क्षेत्रफल में खेती की जा सकती है। इससे खेती की लागत कम होने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने का आह्वान किया।
उप कृषि निदेशक राम मिलन सिंह परिहार ने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री, डिजिटल क्रॉप सर्वे, कृषि यंत्रीकरण, प्रमाणित बीजों पर मिलने वाले अनुदान तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान समय पर पंजीकरण और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर योजनाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त करें।
कार्यक्रम में एपीडा के प्रतिनिधि डॉ. सिद्धार्थ ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि पीलीभीत में बासमती निर्यात से संबंधित इकाई स्थापित की जा रही है। इसके माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा तथा उनके उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने किसानों से उच्च गुणवत्ता वाले बासमती धान के उत्पादन पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र एवं ऋण स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। डूडा विभाग द्वारा पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत नए आवेदन, ऋण स्वीकृति और वितरण की प्रक्रिया भी संपन्न कराई गई।
मेले में प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, पीएम सुरक्षा बीमा योजना, श्रम योगी मानधन योजना सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी किसानों और आम नागरिकों को दी गई।
कृषि और उद्यान क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कई प्रगतिशील किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे किसान जिले में नई कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने और अन्य किसानों को प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी सतीश प्रसाद मिश्रा सहित कृषि एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान किसानों में नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं के प्रति उत्साह देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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