- खाकी करे मित्रवत व्योहार तो अपराध पर लग सकता है अंकुश
अमेठी। कानून व्यवस्था बनाए रखने और लोगों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से स्थापित पुलिस थाने आज भी आम नागरिकों के लिए भय और संकोच का कारण बने हुए हैं। शिकायत दर्ज कराने या किसी मामले में मदद लेने के लिए थाने जाने से पहले ही अधिकांश लोग कई बार सोचते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर बनी नकारात्मक छवि और वर्षों से चला आ रहा डर का माहौल है। पुलिस थाना किसी भी नागरिक के लिए न्याय और सुरक्षा का केंद्र माना जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि आज भी बड़ी संख्या में लोग थाने के अंदर कदम रखने से घबराते हैं। गांवों और कस्बों में रहने वाले लोग अक्सर किसी विवाद, चोरी, मारपीट या अन्य घटना की शिकायत पुलिस तक पहुंचाने के बजाय आपसी समझौते या स्थानीय स्तर पर समाधान खोजने का प्रयास करते हैं। इसके पीछे मुख्य वजह पुलिस के व्यवहार और कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर लोगों के मन में बैठा भय है। कई लोगों का मानना है कि थाने में शिकायत दर्ज कराने पर उन्हें बार-बार बुलाया जाएगा, लंबी पूछताछ का सामना करना पड़ेगा और अनावश्यक परेशानियों से गुजरना होगा। कुछ मामलों में पुलिसकर्मियों के कठोर व्यवहार और शिकायतकर्ताओं के साथ उचित संवाद न होने के कारण भी लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। यही कारण है कि कई पीड़ित व्यक्ति न्याय पाने के बजाय चुप रहना बेहतर समझते हैं। जानकारो का कहना है कि कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि पुलिस थानों में आने वाले लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए, उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और त्वरित कार्रवाई की जाए, तो लोगों का डर स्वतः कम हो सकता है। सरकार और पुलिस विभाग द्वारा समय-समय पर जनसुनवाई, थाना दिवस और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे कार्यक्रम भी इसी उद्देश्य से आयोजित किए जाते हैं। हाल के वर्षों में कई पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क, शिकायत सहायता केंद्र और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं, जिससे लोगों को राहत मिली है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों और आम नागरिकों के बीच पुलिस के प्रति विश्वास का माहौल पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाया है। समाज के जागरूक लोगों का मानना है कि पुलिस और जनता के बीच संवाद बढ़ाने की आवश्यकता है। पुलिस को जनता का मित्र बनकर काम करना होगा और नागरिकों को भी अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक होना होगा। जब पुलिस और समाज के बीच भरोसे की मजबूत नींव तैयार होगी, तभी आम आदमी बिना किसी डर और संकोच के पुलिस थाने में जाकर अपनी बात रख सकेगा और न्याय व्यवस्था पर उसका विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
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