पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में साल 2024 में दुष्कर्म के बाद ट्रेनी डॉक्टर की हत्या के मामले की जांच के सिलसिले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों की एक टीम सोमवार (15 जून, 2026) को अस्पताल पहुंची.
एक अधिकारी के अनुसार, इस टीम में संयुक्त निदेशक स्तर के एक अधिकारी समेत कुल छह अधिकारी शामिल हैं. अधिकारी ने बताया, 'टीम अस्पताल के प्राचार्य, चिकित्सा अधीक्षक, उप-प्राचार्य और अन्य अधिकारियों से मुलाकात करेगी. साथ ही वे अस्पताल के उस स्थान का भी निरीक्षण कर सकते हैं, जहां यह अपराध हुआ था.'
अस्पताल परिसर में नौ अगस्त 2024 की रात महिला चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद देशभर में चिकित्सकों और आम लोगों के बीच भारी आक्रोश फैल गया था. घटना के तुरंत बाद सबूत नष्ट किए जाने और मामले को दबाने की कोशिश किए जाने के भी आरोप लगे थे.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पिछले महीने इस मामले में सबूत नष्ट किए जाने के आरोपों और पीड़ित परिवार की ओर से लगाए गए विशेष आरोपों की नए सिरे से जांच के आदेश दिए थे. अदालत ने सीबीआई को उस रात महिला चिकित्सक के रात का खाना खाने के समय से लेकर अगले दिन शाम को उनके अंतिम संस्कार तक हुई घटनाओं की पूरी श्रृंखला की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया.
जांच एजेंसी को यह अधिकार दिया गया है कि वह जरूरत पड़ने पर किसी भी व्यक्ति से पूछताछ कर सकती है. साथ ही, विशेष जांच दल (SIT) पीड़ित परिवार की ओर से लगाए गए सभी विशेष आरोपों की गहन जांच करेगा. अदालत ने एसआईटी को 25 जून को होने वाली अगली सुनवाई तक अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है.
पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने पिछले सप्ताह कहा था कि राज्य सरकार ने आरजी कर मामले से संबंधित फाइलों को फिर से खोल दिया है. शरद्वत मुखर्जी ने मामले की जांच और उसके संचालन में कथित कमियों को लेकर पीड़िता के माता-पिता की चिंताओं को समझने के लिए उनके साथ करीब डेढ़ घंटे तक बैठक की थी. बीस जनवरी 2025 को इस मामले में दोषी ठहराए गए नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.
