पीलीभीत। कर्बला के शहीद हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जाननिसार साथियों की याद में मोहर्रम का यौमे आशूरा जनपद भर में पूरी अकीदत, श्रद्धा और गमगीन माहौल के बीच मनाया गया। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत ढंग से ताजिए निकाले गए। ष्या हुसैन... या हुसैनष् की सदाओं और मातमी धुनों के बीच ताजिएदारों ने जुलूस निकालकर देर शाम स्थानीय कर्बला में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया। पूरे दिन धार्मिक आयोजनों, तकरीरों, लंगर और मातमी कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहा।
मोहर्रम के अवसर पर शहर की विभिन्न मस्जिदों और इमामबाड़ों में उलेमा-ए-किराम ने हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि करबला की जंग हक और बातिल की जंग थी, जिसमें इमाम हुसैन ने जुल्म, अन्याय और झूठ के सामने सिर झुकाने के बजाय अपने पूरे परिवार की कुर्बानी दे दी, लेकिन सत्य और इंसानियत का रास्ता नहीं छोड़ा। उलेमाओं ने लोगों से इमाम हुसैन की शिक्षाओं पर अमल करने, नमाज की पाबंदी और इंसानियत की राह पर चलने का संदेश दिया।
नगर के विभिन्न मोहल्लों से पारंपरिक ताजिए निकाले गए, जिनमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। ताजियों की आकर्षक सजावट लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। जुलूस के दौरान मातमी धुनों पर नौहे, नात और मनकबत पढ़ी गईं तथा अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन की याद में मातम किया। कई स्थानों पर शहीदान-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जहां उलेमाओं ने तकरीरें पेश करते हुए करबला की कुर्बानी का संदेश लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने तलवारों के साए में भी नमाज अदा कर पूरी उम्मत को यह पैगाम दिया कि किसी भी परिस्थिति में नमाज और सच्चाई का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
मोहर्रम के अवसर पर शहर के विभिन्न स्थानों पर हसनी-हुसैनी लंगर का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं को चने की दाल, रोटी, हलवा, शरबत, खीर, तहरी सहित अन्य प्रसाद वितरित किया गया। लंगर में सभी धर्मों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली।
नगर में ईदगाह रोड पर पूरनपुर क्षेत्र में माधोटांडा रोड और स्टेशन रोड पर पारंपरिक मेले भी लगे, जहां देर रात तक लोगों की भारी भीड़ उमड़ती रही। बच्चों और युवाओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। नगर के अलावा गोरा, रायपुर विचपुरी सहित आसपास के अनेक गांवों में भी ताजिया जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से निकाले गए। मोहर्रम पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। पुलिस अधिकारियों ने पहले ही ताजिएदारों और आयोजकों के साथ बैठक कर परंपरा के अनुरूप शांतिपूर्ण आयोजन करने, निर्धारित मानकों के अनुसार ध्वनि यंत्रों का उपयोग करने, किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन नहीं करने तथा ताजियों को केवल चिन्हित कर्बला स्थलों पर ही दफनाने के निर्देश दिए थे। साथ ही अफवाह फैलाने वालों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए गए थे।
पूरे जनपद में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा और अधिकारियों ने लगातार भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। पुलिस की सतर्कता और आमजन के सहयोग से मोहर्रम का पर्व पूरी तरह शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और भाईचारे के वातावरण में संपन्न हुआ।
