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अमेठीः प्राचीन काली माता मंदिर को अराजकतत्वों से मुक्त कराने की मांग! सौंदर्यीकरण योजना के बीच मंदिर की भूमि पर दावे को लोगों ने किया खारिज


अमेठी। नगर के गौरीगंज मार्ग स्थित प्राचीन काली माता मंदिर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण को लेकर अब शहर के हर वर्ग से आवाज उठने लगी है। वर्षों पुराने इस मंदिर के पुनरुद्धार की मांग लंबे समय से श्रद्धालुओं और नगरवासियों द्वारा की जा रही थी। इसी बीच नगर पंचायत अमेठी के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश सरकार की वंदन योजना में मंदिर का चयन होने के बाद विकास की उम्मीद जगी, लेकिन मंदिर की भूमि और स्वामित्व को लेकर उठे विवाद ने मामले को चर्चा में ला दिया है। नगरवासियों का कहना है कि काली माता मंदिर अमेठी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा प्राचीन स्थल है। शहर के अनेक सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों से जुड़े लोगों ने मंदिर, धर्मशाला और पुजारी आवास के विकास कार्य को जनहित से जुड़ा बताते हुए सौंदर्यीकरण योजना को आगे बढ़ाने की मांग की है। मंदिर की देखरेख लंबे समय तक किराना व्यवसाई स्व. छोटेलाल अग्रहरि द्वारा की जाती रही, जिन्हें नगरवासी पुजारी जी के नाम से जानते थे। उनके निधन के बाद श्रद्धालुओं और सहयोगकर्ताओं ने मंदिर व्यवस्था संचालन के लिए समिति का गठन किया, जिसके अध्यक्ष वर्तमान में सुरेश अग्रहरि हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि फूलचंद कसौधन ने कहा कि स्व. छोटेलाल अग्रहरि ने अपनी निजी संपत्तियों के संबंध में वसीयत की थी, जिसके आधार पर कुछ संपत्तियां उनके परिवार के नाम दर्ज हुईं। उन्होंने दावा किया कि काली माता मंदिर पहले भी मंदिर के रूप में दर्ज था और आज भी उसी स्वरूप में दर्ज है। नगर पंचायत में मंदिर से जुड़े अभिलेख 1976 से उपलब्ध होने की बात भी उन्होंने कही। श्री काली माता मंदिर सेवा समिति के सदस्य अनिल पाल ने मंदिर की प्राचीनता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थल नगर की आस्था का प्रमुख केंद्र है। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष हरिशंकर जायसवाल ने कहा कि मंदिर के निर्माण और विकास में समाज का बड़ा योगदान रहा है। बुजुर्ग कारोबारी अशर्फी लाल मोदनवाल ने भी मंदिर की ऐतिहासिक मान्यता का उल्लेख किया। वरिष्ठ पत्रकार सूर्यभान मिश्र ने कहा कि मंदिर परिसर में सुविधाओं के अभाव के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। सौंदर्यीकरण योजना लागू होने से पार्किंग, आवागमन और अन्य व्यवस्थाओं में सुधार हो सकता है। समाजसेवी शैलेन्द्र शुक्ला विभू ने मंदिर विकास को पूरे क्षेत्र के हित में बताया। वरिष्ठ भाजपा नेता जय प्रकाश लोहिया ने कहा कि काली माता मंदिर लंबे समय से उनकी आस्था का केंद्र रहा है और मंदिरों में बंद ताले देखकर श्रद्धालुओं को पीड़ा होती है। आरएसएस के नगर कार्यवाह अनूप अग्रवाल ने भी मंदिर के विकास की आवश्यकता जताते हुए कार्यों को पारदर्शी तरीके से कराने की बात कही। मंदिर समिति अध्यक्ष सुरेश अग्रहरि ने आरोप लगाया कि पुजारी जी के नाती पवन अग्रहरि को मानवीय आधार पर अस्थायी रूप से मंदिर परिसर के कमरों में रहने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब स्वामित्व का दावा किया जा रहा है। वहीं दूसरा पक्ष अपने दावे पर कायम है और मामला प्रशासनिक व न्यायिक स्तर तक पहुंच चुका है। अब नगरवासियों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि प्राचीन आस्था स्थल के जीर्णोद्धार का रास्ता कब साफ होगा और वंदन योजना के तहत विकास कार्य कब धरातल पर उतरेंगे। मंगलवार को मंदिर परिसर में पूजा और भंडारे से पहले हुई अराजकता को लेकर भी नगर के लोगों में नाराजगी है और उन्होंने प्रशासन से मंदिर व्यवस्था सुरक्षित करने की मांग की है।

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