Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

कॉन्स्टेबल सुनील कुमार शुक्ला बर्खास्त


लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने कॉन्स्टेबल सुनील कुमार शुक्ला को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात रहे सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने कुछ दिन पहले गणना प्रभारी और दूसरे लोगों पर 2000 रुपए हर महीने लेने का आरोप लगाया था और चार वीडियो जारी किए थे। हालांकि, जांच के दौरान वह अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं पेश कर सके। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

लखनऊ पुलिस की तरफ से बताया गया कि विभागीय जांच में सोशल मीडिया/मीडिया मंचों के दुरुपयोग, विभागीय अनुशासनहीनता और नियमों के लगातार उल्लंघन के दोषी पाए जाने पर आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला पुलिस सेवा से बर्खास्त किए गए हैं।

इस मामले में सात मई को एक जांच समिति बनाई गई थी। जांच समिति ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए। इस दौरान आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला सहित सभी संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच में यह सिद्ध हुआ कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध न सिर्फ निराधार रूप से आरोप सार्वजनिक रूप से प्रसारित किए, बल्कि विभाग की छवि को बिना साक्ष्य के धूमिल करने का प्रयास किया। पुलिस बल में अनुशासनहीनता को बढ़ावा दिया, अधिकारियों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया और बिना अनुमति सोशल मीडिया का उपयोग कर उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया नीति-2023, उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 के नियम 3, 6, 7 एवं 27 तथा उत्तर प्रदेश वर्दी विनियम का उल्लंघन किया। आरोप सिद्ध होने पर सुनील कुमार शुक्ला को पुलिस सेवा से बर्खास्त किया गया है।

मूल रूप से अमेठी के गौरीगंज के रहने वाले सुनील कुमार शुक्ला 2015 बैच के सिपाही हैं। वे लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात थे। उन्होंने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर कई वीडियो जारी किए थे, जिसमें पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि ड्यूटी बदलने के बदले में हर महीने हर सिपाही से 2000 रुपये लिए जाते हैं। उनका आरोप था कि यह रैकेट रिजर्व पुलिस लाइन के आरआई, गणना प्रभारी और अन्य अधिकारियों तक फैला हुआ है। पैसा ऊपर आईपीएस अधिकारियों तक जाता है। उन्होंने विभाग को काले अंग्रेज और जमींदारी प्रथा चलाने वाला बताया था। एक महिला हेड कांस्टेबल नीतू सिंह पर भी कार्रवाई हुई। आरोपों की जांच चली, और दारोगा समेत 12 पुलिसकर्मियों को गणना कार्यालय से हटाया गया।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |