शाहबाद। इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की दसवीं तारीख यानी आशूरा के पवित्र अवसर पर शुक्रवार को शाहबाद कस्बे में मुस्लिम समुदाय ने नवासा-ए-रसूल, इमाम हुसैन की शहादत को बड़े अकीदत और गमगीन माहौल में याद किया। इमामबाड़ों से लेकर घरों तक फातेहा-दुरूद की तिलावत की गई और जगह-जगह लंगर व सबील का आयोजन किया गया।
कस्बे के मोहल्ला जिलेदरान स्थित तकिया चौक से ताजियों का जुलूस रवाना हुआ। अजादार मर्सियां पढ़ते और मातम करते हुए आगे बढ़ते रहे। पूरे जुलूस के दौरान ष्या हुसैन-या हुसैनष् की सदाओं से फिजाएं गूंजती रहीं। जुलूस कोतवाली पहुंचा, फिर बजरंग चौक से बरवालान होते हुए वापस मोहल्ला जिलेदरान पहुंचकर संपन्न हुआ। गौरतलब है कि आशूरा वह तारीख है जब सन् 680 ईस्वी में इराक के करबला में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके साथियों को शहीद कर दिया गया था। तभी से यह दिन पूरी दुनिया में मुस्लिम समुदाय के लिए शोक और आस्था का प्रतीक है।
जुलूस के दौरान प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह चाक-चौबंद रहा। एसडीएम आशुतोष कुमार और सीओ देवकी नंदन ने नगर का भ्रमण कर जुलूस का निरीक्षण किया। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार पूरे समय जुलूस के साथ बने रहे। इनके अलावा अपराध निरीक्षक जयप्रकाश यादव, निरीक्षक राजकुमार, वरिष्ठ उपनिरीक्षक रामचंद्र, उपनिरीक्षक अतिशय जैन, उपनिरीक्षक रमेश चंद्र, प्रधान आरक्षी अनिल कुमार, आरक्षी राहुल कुमार और महिला आरक्षी संध्या उपाध्याय सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा। उल्लेखनीय है कि मुहर्रम 2026 को लेकर यूपी शासन स्तर पर पहले से ही सख्त निर्देश जारी किए गए थे। यूपी पुलिस महानिदेशक ने सभी इकाइयों को निर्देश दिए थे कि जुलूस पूर्व निर्धारित मार्गों पर ही निकलें और किसी नए रूट की अनुमति न दी जाए। इसी के तहत संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से निगरानी की व्यवस्था भी की गई थी।
शाहबाद में मुहर्रम का पर्व पूरी तरह शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। प्रशासन और नागरिकों के आपसी सहयोग से मुहर्रम पर्व को गरिमामय ढंग से संपन्न कराने की यह मिसाल कस्बे में सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को और मजबूत करती है।
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