Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

यूएन में भारत की सख्त चेतावनी! जवाबदेही के बिना बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती-भारत


भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में कहा कि जवाबदेही के बिना बच्चों की सुरक्षा का प्रयास अधूरा है और जो लोग दंड के भय के बिना स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाते हैं, उन्हें हर हाल में उनके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा, ‘शिक्षा एक ऐसा मौलिक अधिकार है, जो संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी कायम रहना चाहिए. इसे पाना स्थायी शांति स्थापित करने की सबसे प्रभावी नींवों में से एक है.

सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित बच्चों की सुरक्षा तथा उनके सीखने, विकसित होने और अपनी पूरी क्षमता हासिल करने के अधिकार की रक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता अटूट है.' वह बुधवार को यहां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली चर्चा ‘‘सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित बच्चों की शिक्षा की रोकथाम और सुरक्षा को मजबूत बनाना : नीतिगत प्रतिबद्धताओं से प्रभावी क्रियान्वयन तक’ विषय पर अपने विचार रख रहे थे.

राजदूत पर्वतनेनी ने कहा, सुरक्षा तभी सार्थक है, जब उसके साथ जवाबदेही भी सुनिश्चित हो. जो लोग दंड के भय के बिना स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाते हैं, उन्हें उनके अपराधों के लिए कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वर्ष 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में बच्चों के अधिकारों के 38,558 गंभीर उल्लंघनों की पुष्टि हुई, जिनसे 24,174 बच्चे प्रभावित हुए. इनमें 15,493 लड़के, 7,990 लड़कियां और 691 ऐसे बच्चे शामिल थे, जिनकी लैंगिक पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी. यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

रिपोर्ट के अनुसार, गंभीर उल्लंघनों से प्रभावित बच्चों की संख्या 2024 के 3,137 से बढ़कर 2025 में 3,176 हो गई. वहीं स्कूलों पर हमलों में सिर्फ एक साल में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. पर्वतनेनी ने कहा कि दुनिया में करीब 47.3 करोड़ बच्चे संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में रह रहे हैं या विस्थापित हैं. इनमें 8.5 करोड़ से अधिक बच्चे शिक्षा से वंचित हैं. उन्होंने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक प्रतिबद्धताओं को जमीन पर उतारने में दुनिया असफल रही है.

हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है. भारत में 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को संविधान के तहत निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए भारत ने 'दीक्षा' डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया है. कोविड-19 के दौरान भारत ने डिजिटल तकनीक के जरिए शिक्षा की निरंतरता बनाए रखी और संघर्ष की परिस्थितियों में भी इसे बच्चों की पढ़ाई का मजबूत माध्यम बताया. पर्वतनेनी ने कहा कि भारत ने शरणार्थी और विस्थापित बच्चों की शिक्षा में भी लगातार निवेश किया है, क्योंकि शिक्षा ही उन्हें कठिन परिस्थितियों से उबरने और बेहतर भविष्य की उम्मीद देती है.

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |