94 साल की महालक्ष्मम्मा ने भारतीय पहचान वापस पाने US नागरिकता छोड़ी
June 26, 2026
जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर इंसान अक्सर वहीं लौटना चाहता है, जहां से उसकी यात्रा शुरू हुई थी. साल 2000 में अमेरिका के वर्जीनिया जाने के बावजूद कोंड्रुगुंटा महालक्ष्मम्मा का मन हमेशा भारत में ही बसा रहा. वर्ष 2018 में वह अपने पैतृक गांव लौट आईं और अब उन्होंने बापटला जिला कलेक्टर डॉ. जे. विनोद कुमार से भारतीय नागरिकता बहाल करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया है, ताकि वह अपने जीवन के अंतिम वर्ष एक गौरवान्वित भारतीय के रूप में अपने देश में बिता सकें.
करीब दो दशक तक अमेरिका में रहने के बाद उनकी सिर्फ एक इच्छा है कि अपने जीवन के अंतिम दिन भारतीय नागरिक के रूप में बिताना और अंतिम संस्कार अपने पैतृक गांव की मिट्टी में होना. आंध्र प्रदेश के बापटला जिले के चिनागंजम मंडल के चिंथागुम्पला गांव की रहने वाली महालक्ष्मम्मा ने जुलाई 2000 में अमेरिका की नागरिकता हासिल की थी. इसके बाद उन्होंने लगभग 18 साल तक अमेरिका में जीवन बिताया. हालांकि वर्ष 2018 में वह भारत लौट आईं और तभी से अपने वतन में रह रही हैं.
महालक्ष्मम्मा अपने बेटे के साथ बापटला जिला कलेक्टर के कार्यालय पहुंचीं. वहां उन्होंने भारतीय नागरिकता बहाल करने के लिए पहले से ऑनलाइन जमा किए गए आवेदन से जुड़े जरूरी दस्तावेज सौंपे और प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का अनुरोध किया. उन्होंने अमेरिकी पासपोर्ट का भी औपचारिक रूप से त्याग कर दिया है.
जिला कलेक्टर से मुलाकात के दौरान महालक्ष्मम्मा ने बताया कि उनकी उम्र अब 95 वर्ष के करीब पहुंच चुकी है. उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा भी अधिकारियों के सामने रखी. उनका कहना है कि वह अपने जीवन के अंतिम दिन भारतीय नागरिक के रूप में बिताना चाहती हैं और उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में ही किया जाए.
फिलहाल जिला प्रशासन उनके आवेदन की सामान्य सत्यापन प्रक्रिया के तहत जांच कर रहा है. अधिकारियों की ओर से अभी यह नहीं बताया गया है कि भारतीय नागरिकता बहाल करने पर अंतिम फैसला कब तक लिया जाएगा.
इस भावनात्मक मामले ने सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा है. बड़ी संख्या में लोग महालक्ष्मम्मा के फैसले को मातृभूमि से गहरे जुड़ाव का प्रतीक बता रहे हैं. उनका मानना है कि दुनिया के किसी भी कोने में रहने के बावजूद अपनी जन्मभूमि से जुड़ाव और अपनी मिट्टी में लौटने की चाह कभी खत्म नहीं होती.
