Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

अपने ही विभाग से 99 लाख की सब्सिडी लेकर विवादों में घिरे मोदी के मंत्री भागीरथ चौधरी


एक तरफ देश का किसान सरकारी योजनाओं का फायदा लेने के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटता है. नेताओं और अफसरों से सिफारिश करता है, तो दूसरी तरफ मोदी सरकार के एक मंत्री का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश की सियासत में बड़ा बवंडर पैदा कर दिया है.

दरअसल, राजस्थान के अजमेर से BJP के सांसद और मोदी सरकार में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी खीरे की खेती के नाम पर अपने ही मंत्रालय से करीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी को लेकर विवादों में घिर गए हैं. मंत्री का कहना है कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही, लेकिन विपक्ष इसे मंत्री के रसूख का मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग कर रहा है.

भागीरथ चौधरी के इस मामले के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या कोई केंद्रीय मंत्री अपने ही मंत्रालय की योजना से लाखों रुपये की सब्सिडी ले सकता है? यह नियमों के दायरे में है या फिर यह सत्ता का फायदा उठाने का मामला है?

विवाद राजस्थान में भागीरथ चौधरी के एग्रीकल्चर फार्म हाउस से जुड़ा है. यहां उन्होंने आधुनिक तकनीक से खीरे की खेती के लिए पॉली हाउस तैयार किया है. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 1 करोड़ 99 लाख रुपये बताई गई. इसी परियोजना पर राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना के तहत करीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी मंजूर हुई और यहीं से सवाल खड़े होने लगे.

ऐसा इसलिए हो रहा क्योंकि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करता है और भागीरथ चौधरी इसी मंत्रालय में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री हैं. इतना ही नहीं, वे इस बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष भी हैं. ऐसे में विपक्ष का कहना है कि अपने ही मंत्रालय की योजना का लाभ लेना नैतिक रूप से सही नहीं माना जा सकता है.

जानकारी के मुताबिक, मंत्री ने साल 2025 में इस योजना के लिए आवेदन किया था. इसके बाद अधिकारियों ने परियोजना का निरीक्षण किया, दस्तावेजों की जांच हुई और पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मार्च 2026 में करीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी मंजूर कर दी गई. यह राशि सीधे बैंक के उस लोन खाते में भेजी गई, जिससे परियोजना के लिए कर्ज लिया गया था.

हालांकि, नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में अंतिम मंजूरी समिति देती है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि जब लाभ लेने वाला व्यक्ति खुद उसी मंत्रालय का मंत्री हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है.

इस मामले में लग रहे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि उन्होंने कुछ भी छिपाकर नहीं किया. उनका कहना है कि वे पहले किसान हैं, बाद में मंत्री. उन्होंने कहा कि जिस योजना का फायदा देश का कोई भी पात्र किसान ले सकता है, उसी योजना के तहत उन्होंने भी आवेदन किया. उन्होंने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हुई और किसी तरह का विशेष लाभ नहीं लिया गया.

वहीं, विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि यह सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि नैतिकता का भी मामला है. पार्टी नेताओं का कहना है कि जब आम किसान छोटी-छोटी सब्सिडी के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटते हैं, तब मंत्री अपने ही मंत्रालय से करोड़ों की परियोजना पर लाखों रुपये की सब्सिडी ले रहे हैं. कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है.

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जब मंत्री अपने ही मंत्रालय से लाभ लेते हैं तो पारदर्शिता पर सवाल उठना लाजिमी है. राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने भी इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए जांच की मांग की है. उन्होंने नैतिकता को लेकर भी सवाल उठाए हैं.

जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि सरकार में सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.

फिलहाल मंत्री अपनी सफाई दे चुके हैं और दावा कर रहे हैं कि सब कुछ नियमों के तहत हुआ, लेकिन सवाल अभी भी वही है कि क्या किसी मंत्री को अपने ही मंत्रालय की योजना का लाभ लेना चाहिए. भले ही नियम इसकी इजाजत देते हों? यही सवाल अब इस पूरे विवाद के केंद्र में है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के आसार हैं.

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |