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इंजन से टकराया मोर और रुक गई ट्रेन, सुधारने में लगे 45 मिनट


कानपुर के शिवराजपुर रेलवे स्टेशन के पास एक मोर ट्रेन के इंजन से टकरा गया। इस वजह से ट्रेन 45 मिनट तक रुकी रही। अधिकारियों ने इंजन में आई गड़बड़ी ठीक की। इसके बाद ट्रेन को रवाना किया गया। लखनऊ से कासगंज जा रही पैसेंजर ट्रेन के इंजन से भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर टकरा गया। मोर की मौके पर मौत हो गई और वह इंजन के पैंटो में फंस गया। इस वजह से गाड़ी को करीब 45 मिनट तक रोका गया। टेक्निकल टीम ने जब पैंटो से मोर को बाहर निकाला, तब जाकर गाड़ी अपने गंतव्य के लिए आगे बढ़ सकी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रेन शिवराजपुर स्टेशन से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान एक मोर अचानक उड़ान भरते हुए इंजन के ऊपर लगे पैंटो के संपर्क में आ गया। टक्कर के बाद मोर हाईटेंशन ओवरहेड विद्युत लाइन की चपेट में आ गया, जिससे इंजन को मिलने वाली बिजली सप्लाई बाधित हो गई। बिजली सप्लाई रुकते ही ट्रेन की गति थम गई और चालक को तत्काल ट्रेन रोकनी पड़ी।

ट्रेन चालक ने स्थिति को समझते हुए तुरंत स्टेशन मास्टर और रेलवे कंट्रोल को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही रेलवे के तकनीकी कर्मचारी और संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान पता चला कि मोर पैंटो के पास फंसा हुआ है, जिसके कारण विद्युत आपूर्ति बाधित हुई है। कर्मचारियों ने सावधानीपूर्वक मोर को हटाया और पैंटो सहित ओवरहेड उपकरणों की विस्तृत जांच शुरू की। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए पैंटो, ओएचई (ओवरहेड इक्विपमेंट) और इंजन की पूरी तकनीकी जांच की गई ताकि आगे किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि विद्युत आपूर्ति सामान्य है और ट्रेन को सुरक्षित रूप से संचालित किया जा सकता है।

करीब 45 मिनट तक चले निरीक्षण और मरम्मत कार्य के बाद रेलवे कर्मचारियों ने ट्रेन को दोबारा संचालन के लिए तैयार किया। सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि होने के बाद लखनऊ-कासगंज पैसेंजर ट्रेन को अपने गंतव्य की ओर रवाना कर दिया गया। घटना के चलते कुछ समय के लिए रेल संचालन प्रभावित रहा, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि नदी और हरित क्षेत्रों के आसपास बड़ी संख्या में पक्षियों की मौजूदगी के कारण कभी-कभी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। इसके बावजूद यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए हर घटना में पूरी तकनीकी जांच के बाद ही ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाता है।

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