मोहनलालगंज/ लखनऊ।जननायक सुजीत पाण्डेय मेमोरियल ट्रस्ट एवं प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में दिव्यांगजनों, वृद्धजनों एवं दिव्यांग बच्चों के कल्याण हेतु 17 एवं 18 जून को कालेवीर बाबा मंदिर प्रांगण, मोहनलालगंज में दो दिवसीय विशेष सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के माध्यम से लगभग 400 से अधिक जरूरतमंद दिव्यांग एवं वृद्धजनों को सहायक उपकरण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग दिया गया।
शिविर के दूसरे दिन मुख्य अतिथियों में सहायक पुलिस आयुक्त राजेश कुमार सिंह, ब्लॉक प्रमुख मोहनलालगंज ओम प्रकाश शुक्ला तथा ब्लॉक प्रमुख गोसाईगंज विनय वर्मा ‘डिंपल’ सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने जरूरतमंद लाभार्थियों को सहायक उपकरण वितरित किए।
ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अजय पाण्डेय ‘सत्यम्’ ने बताया कि ट्रस्ट के स्वयंसेवकों द्वारा विकास खंड मोहनलालगंज की विभिन्न ग्राम पंचायतों में घर-घर जाकर जरूरतमंद दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनों का सर्वेक्षण कर उनका पंजीकरण कराया गया था। चयनित लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार ट्राई साइकिल, मोटराइज्ड ट्राई साइकिल, सर्वाइकल कॉलर, छड़ी, कमर बेल्ट सहित विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में सहयोग प्रदान करना है।
कार्यक्रम प्रभारी एवं राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता अवधेश कुमार ने कहा कि ऐसे जनकल्याणकारी प्रयास समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के जीवन में नई आशा और आत्मविश्वास का संचार करते हैं तथा समाज को सेवा और संवेदनशीलता का संदेश देते हैं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वयंसेवकों को ट्रस्ट की ओर से प्रमाण-पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।दोनों दिनों के शिविर में बड़ी संख्या में समाजसेवी, पत्रकार एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र से श्याम मोहन शुक्ला, श्रीकांत एवं लिपू दलाई सहित अनेक कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने कार्यक्रम के सफल संचालन में सहयोग प्रदान किया। यह आयोजन सामाजिक सरोकार, सेवा एवं मानवता के प्रति ट्रस्ट की प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया, जिससे सैकड़ों जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई आशा और आत्मविश्वास का संचार हुआ।
