लखनऊ। राजधानी के ट्रांसपोर्ट नगर से नगर निगम के इंजीनियरों की अजीबोगरीब और लापरवाही से भरी इंजीनियरिंग का एक अनोखा मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक शिकायत के अनुसार, नगर निगम लखनऊ के इंजीनियरों ने ट्रांसपोर्ट नगर (म्-49) क्षेत्र में मानक को ताक पर रखकर एक ऐसा नाला तैयार कर दिया है, जो सामान्य सड़क से करीब 3 फीट ऊंचा है। इस श्अनोखेश् निर्माण को देखकर स्थानीय लोग और व्यापारी हैरान हैं और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठा रहे हैं।
आमतौर पर नाले का निर्माण सड़क के जलस्तर को ध्यान में रखकर किया जाता है ताकि बारिश या रोजमर्रा का पानी आसानी से बह सके। लेकिन यहां मामला बिल्कुल उल्टा है। पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा गया है कि “लगता है नाले को सड़क के पानी से श्एलर्जीश् थी, इसलिए उसे 3 फीट ऊंचे वीआईपी आसन पर बैठा दिया गया।”
इस मानक विहीन निर्माण के कारण क्षेत्र में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं रह गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस बार मानसून की बारिश में यह नाला पानी सोखने के बजाय मुसीबत का सबब बनेगा।
ट्रांसपोर्ट नगर के व्यापारियों में इस निर्माण को लेकर भारी नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि वे सरकार और नगर निगम को करोड़ों रुपये का टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी ठीक से नहीं मिल पा रही हैं। इस गलत निर्माण के कारण आगामी बरसात में पूरा पानी सड़कों और आसपास के गोदामों में भरने की पूरी आशंका है, जिससे लाखों रुपये के माल का नुकसान हो सकता है। व्यापारियों ने इसे नगर निगम की तरफ से मिलने वाला ष्जलभराव का रिटर्न गिफ्टष् बताया है।
इस अव्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर सीधे लखनऊ नगर निगम, उत्तर प्रदेश नगर विकास विभाग और सूबे के नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा समेत महापौर सुषमा खर्कवाल से जवाब मांगा गया है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या इसी को ष्स्मार्ट सिटीष् की ष्स्मार्ट इंजीनियरिंगष् कहा जाता है?
अब देखना यह होगा कि इस शिकायत के बाद नगर निगम के आला अधिकारी अपनी गलती सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं, या फिर व्यापारियों को इस मानसून डूबने के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
