लखनऊ। सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित और कैशलेस इलाज देने के लिए संचालित श्पीएम-राहत योजनाश् के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.बी. सिंह और अन्य विशेषज्ञों ने योजना से जुड़े मुख्य बिंदुओं की जानकारी देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को हादसे के पहले 7 दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिलेगा। यह सभी प्रकार की सड़कों (राष्ट्रीय, राज्य या शहरी) पर लागू होगा। योजना का लाभ केवल उन्हीं मरीजों को मिलेगा, जिन्हें दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती कराया गया हो। यदि पीड़ित के पास आयुष्मान कार्ड है, तब भी उसे प्राथमिकता के आधार पर पहले श्पीएम-राहत योजनाश् के तहत ही भर्ती कर इलाज दिया जाएगा। इलाज के लिए पुलिस द्वारा ई-डीएआर पोर्टल पर समयबद्ध रूप से विक्टिम आईडी बनाना जरूरी है। इसके बिना लाभ मिलने में दिक्कत आ सकती है। अस्पतालों के खर्च की प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना कोष से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य श्गोल्डन ऑवरश् (दुर्घटना के ठीक बाद का कीमती समय) में जान बचाना है।
इस कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग और आयुष्मान भारत योजना से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी व तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे।
