मुरादाबाद( विधान केसरी)तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू), मुरादाबाद ने एक बार फिर शिक्षा जगत में खुद को एक उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान साबित कर दिखाया है। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के बेहद सख्त मानकों पर खरा उतरते हुए टीएमयू ने उत्तर प्रदेश की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ के बीच अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
नैक (NAAC) की तरह ही यूजीसी से 12बी की मान्यता मिलना किसी भी विश्वविद्यालय के लिए सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। यूजीसी द्वारा हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की कुल 53 प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ में से तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी समेत केवल छह विश्वविद्यालयों के पास ही यह प्रतिष्ठित 12बी की मान्यता उपलब्ध है।
क्या है 12बी मान्यता का महत्व?
उच्च शिक्षा के विशेषज्ञों के अनुसार, यह मान्यता छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। दरअसल, 12बी किसी भी यूनिवर्सिटी के लिए एक बेहद प्रतिष्ठित स्टेटस (दर्जा) होता है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
केंद्रीय वित्तीय अनुदान: इस दर्जे को प्राप्त करने के बाद विश्वविद्यालय के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता और अनुदान का रास्ता साफ हो जाता है।
शोध और प्रोजेक्ट्स: शोध परियोजनाओं (Research Projects) और केंद्रीय प्रोजेक्ट्स का सीधा लाभ उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओं को मिलता है।
रैंकिंग में सुधार: यह मान्यता भविष्य में होने वाली प्रत्यायन और रैंकिंग प्रक्रियाओं के प्रदर्शन में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विशेष नोट: इस दर्जे के बिना कोई भी विश्वविद्यालय अनुसंधान परियोजनाओं, आधुनिक प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, छात्रावासों और अन्य विकास संबंधी गतिविधियों के लिए किसी भी प्रकार की केंद्रीय सहायता प्राप्त करने का हकदार नहीं होता है।
मान्यता मिलने की कठोर प्रक्रिया
किसी भी उच्च शैक्षणिक संस्थान को 12बी का दर्जा मिलने से पूर्व यूजीसी अधिनियम की धारा 2(एफ) के तहत मान्यता प्राप्त होनी अनिवार्य है। इस कसौटी पर खरा उतरने के बाद ही आगे का मार्ग प्रशस्त होता है।
इसके बाद विश्वविद्यालय को अपने परिसर में पर्याप्त शैक्षणिक अवसंरचना (Infrastructure), योग्य व अनुभवी संकाय (Faculty), आधुनिक प्रयोगशालाएं और समृद्ध पुस्तकालय जैसी आवश्यक सुविधाएं प्रदर्शित करनी होती हैं। अंतिम निर्णय लेने से पहले यूजीसी द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) विश्वविद्यालय परिसर का भौतिक निरीक्षण करती है। मानकों पर पूरी तरह खरा उतरने के बाद ही यह दर्जा प्रदान किया जाता है। टीएमयू को यह गौरवपूर्ण 12बी की मान्यता वर्ष 2021 में प्राप्त हुई थी।
प्रदेश की अन्य यूनिवर्सिटीज़ की स्थिति
उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थिति को देखें तो कुल 53 प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ में करीब 2.9 लाख छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश की शेष कई यूनिवर्सिटीज़ ने तो इस दर्जे के लिए अब तक आवेदन भी नहीं किया है। हालांकि, वर्तमान में 12बी के लिए सात अन्य विश्वविद्यालयों के आवेदन यूजीसी के पास लंबित पड़े हैं।
नेतृत्व की दूरदर्शिता का परिणाम
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने कहा कि हमारी यूनिवर्सिटी को 12-बी का दर्जा मिलना बड़े सपनों के साकार होने जैसा है। वहीं, टीएमयू के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन ने इस सफलता का श्रेय कुलाधिपति श्री सुरेश जैन और जीवीसी श्री मनीष जैन की दूरदर्शी सोच, डायनामिक लीडरशिप, उच्च स्तरीय शोध और स्टार्टअप्स के प्रति उनके अटूट समर्पण को दिया है।
ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभवी फैकल्टी
वर्ष 2008 में जैन अल्पसंख्यक श्रेणी के तहत मुरादाबाद में स्थापित हुई टीएमयू में आज देश के लगभग सभी राज्यों से छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। विश्वविद्यालय का इंफ्रास्ट्रक्चर वैश्विक स्तर के उच्च शिक्षण संस्थानों के समकक्ष है, और यहाँ की फैकल्टी व गेस्ट फैकल्टी उच्च शिक्षित होने के साथ-साथ बेहद अनुभवी है, जो छात्रों के सुनहरे भविष्य का निर्माण कर रही है।
