बीसलपुर। जनपद की तहसील बीसलपुर के बिलसंडा कस्बे की सराफा बाजार में संचालित गोल्ड टेस्टिंग लैब एक बार फिर विवादों में आ गई है। सोने के आभूषणों की जांच में भारी अंतर सामने आने के बाद सराफा व्यापारियों और ग्राहकों के बीच असमंजस और नाराजगी का माहौल बना हुआ है। आरोप है कि लैब में बिना प्रमाण पत्र दिए हाथ से लिखी पर्चियों के आधार पर जांच रिपोर्ट दी जा रही है, जिससे ग्राहक भ्रमित हो रहे हैं और व्यापारियों के साथ विवाद की स्थिति बन रही है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में एक ग्राहक ने करीब दो वर्ष पूर्व खरीदी गई पांच ग्राम की सोने की चेन की जांच बिलसंडा स्थित गोल्ड टेस्टिंग सेंटर पर कराई। आरोप है कि जांच रिपोर्ट को लेकर ऐसा माहौल बनाया गया कि ग्राहक व्यापारी पर गंभीर आरोप लगाने लगा।
बताया जा रहा है कि ग्राहक ने थाने में खरीद की रसीद दिखाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। मामले को शांत कराने के लिए व्यापारी को भारी नुकसान उठाते हुए लगभग 20 हजार रुपये की क्षति सहनी पड़ी और अंततः ग्राहक को दूसरी चेन देकर मामला निपटाया गया।
सूत्रों के मुताबिक एक अन्य मामले में ग्राहक द्वारा खरीदी गई सोने की अंगूठी की जांच बिलसंडा की लैब में कराई गई, जहां बिना किसी आधिकारिक प्रमाण पत्र के हाथ से लिखी पर्ची पर 48.73 प्रतिशत शुद्धता दर्शाई गई।
इस रिपोर्ट के बाद ग्राहक व्यापारी की दुकान पर पहुंच गया और विवाद की स्थिति बन गई। व्यापारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उसी अंगूठी की जांच बीसलपुर तहसील के दो अलग-अलग गोल्ड टेस्टिंग सेंटरों पर कराई। दोनों सेंटरों की रिपोर्ट में क्रमशः 53.89 प्रतिशत और 54.03 प्रतिशत शुद्धता दर्ज की गई। तीन अलग-अलग जांच रिपोर्टों में भारी अंतर सामने आने के बाद बिलसंडा की गोल्ड टेस्टिंग लैब की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। व्यापारियों का कहना है कि गोल्ड टेस्टिंग सेंटर द्वारा ग्राहकों को अधिकृत प्रमाण पत्र देने के बजाय बिना तारीख और बिना स्पष्ट विवरण वाली पर्चियां दी जा रही हैं। इससे ग्राहकों में भ्रम फैल रहा है और सराफा कारोबारियों की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।सराफा व्यापारियों का आरोप है कि गलत या संदिग्ध जांच रिपोर्टों के कारण आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है, जिससे बाजार का माहौल भी खराब हो रहा है।
मामला तूल पकड़ने के बाद अब सराफा बाजार में गोल्ड टेस्टिंग लैब की विश्वसनीयता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। व्यापारियों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने और अधिकृत प्रमाणित व्यवस्था लागू किए जाने की मांग उठाई है। हालांकि अब तक जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे व्यापारियों और ग्राहकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

