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सत्ता में आए न आए लेकिन बसपा के कामों को नकारा नहीं जा सकता



विशेष रिपोट-

जिसके पैर थी फटी बिवाई उसी समझी थी पीर पराई

​लखनऊ। (विधान केसरी लखनऊ)  उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2007 से 2012 का कालखंड बुनियादी ढांचे, शिक्षा और सामाजिक न्याय के प्रतीक स्मारकों के लिए जाना जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व में बसपा सरकार ने न केवल प्रदेश की ढांचागत स्थिति को बदला, बल्कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी कई मील के पत्थर स्थापित किए।
​शिक्षा और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प
​बसपा सरकार ने शिक्षा को विकास की धुरी बनाया। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (Greater Noida) और महामाया तकनीकी विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं की स्थापना ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को शिक्षा का केंद्र बनाया। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 'सावित्री बाई फुले बालिका शिक्षा मदद योजना' ने हजारों बालिकाओं को साइकिल और आर्थिक सहायता देकर स्कूलों तक पहुँचाया।
  • ​रोजगार और पुलिस भर्ती की मिसाल
  • ​रोजगार के क्षेत्र में बसपा शासनकाल को पारदर्शी भर्तियों के लिए याद किया जाता है।
  • ​1.08 लाख सफाईकर्मियों की ऐतिहासिक भर्ती।
  • ​88 हजार BTC शिक्षकों की नियुक्ति।
  • ​41 हजार पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती।
इन कदमों ने प्रदेश के युवाओं को बड़े स्तर पर सरकारी सेवाओं से जोड़कर आर्थिक मजबूती प्रदान की।
​आवास और जनकल्याण: लाखों गरीबों को मिली छत
​बहुजन समाज पार्टी की सरकार ने समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए आवासीय योजनाओं को प्राथमिकता दी।

​कांशीराम शहरी आवास योजना: इस योजना के तहत प्रदेश भर में 1.5 लाख (डेढ़ लाख) से अधिक पक्के मकान आवंटित किए गए। रिकॉर्ड के अनुसार, योजना के विभिन्न चरणों में एक लाख एक हज़ार से अधिक परिवारों को सीधे तौर पर उनके अपने घरों का मालिकाना हक मिला।
​इसके साथ ही, 'सर्वजन हिताय गरीब आवास मालिकाना हक योजना' के माध्यम से लाखों भूमिहीन परिवारों को जमीन और आवास की सुविधा दी गई।

​आधुनिक बुनियादी ढांचा: एक्सप्रेसवे युग की शुरुआत

​आज जिस एक्सप्रेसवे संस्कृति की चर्चा होती है, उसकी नींव बसपा शासन में पड़ी थी। यमुना एक्सप्रेसवे और नोएडा एक्सप्रेसवे ने न केवल यात्रा को सुगम बनाया बल्कि निवेश के द्वार खोले। साथ ही, बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (F1 रेसिंग ट्रैक) ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक मानचित्र पर स्थान दिलाया।

​सामाजिक न्याय और सम्मान का प्रतीक

​लखनऊ में 'डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल' और 'मान्यवर कांशीराम जी स्मारक स्थल' का निर्माण कराकर बसपा ने बहुजन महापुरुषों को वह सम्मान दिया जो दशकों से उपेक्षित था। ये केवल स्मारक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और पहचान का केंद्र बन गए हैं।

​निष्कर्ष

​बसपा सरकार का यह कार्यकाल विकास और सामाजिक संतुलन का एक अनूठा संगम था। जहाँ एक तरफ एक्सप्रेसवे और रेसिंग ट्रैक जैसी आधुनिक परियोजनाएं थीं, वहीं दूसरी तरफ गांव के गरीब बच्चे के लिए 'अम्बेडकर ग्राम योजना' और शहरों में 'कांशीराम आवास' की सुविधा थी। यह फेहरिस्त साबित करती है कि शासन में इच्छाशक्ति हो तो प्रदेश की तस्वीर बदली जा सकती है।

​सम्पादकीय टिपणी: यह रिपोर्ट उन महत्वपूर्ण कार्यों को रेखांकित करती है जो उत्तर प्रदेश के आधुनिक स्वरूप की नींव बने।

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