लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल अपने चरम पर है। सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल का विस्तार कल या आगामी सोमवार को हो सकता है। माना जा रहा है कि बंगाल सरकार के शपथ ग्रहण के ठीक अगले दिन यूपी में यह बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा। 4 मई को होने वाली मंत्रिपरिषद की बैठक वर्तमान मंत्रियों के लिए अंतिम बैठक साबित हो सकती है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों पर जोर
इस विस्तार में भारतीय जनता पार्टी आगामी समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश कर रही है:
पश्चिमी यूपी: जाट और गुर्जर बिरादरी को कैबिनेट में बड़ा प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
पूर्वांचल: ओबीसी समाज के दो बड़े चेहरों को शामिल कर उन्हें सियासी ताकत दी जाएगी।
ब्राह्मण और दलित कार्ड: मंत्रिमंडल में एक नए ब्राह्मण चेहरे की एंट्री तय मानी जा रही है, जबकि एक पुराने दिग्गज ब्राह्मण नेता को फिर से मौका मिल सकता है। दलित समुदाय से भी दो नए चेहरों को जगह मिलने की उम्मीद है।
बड़े दिग्गजों पर गाज, 'अपनों' का भविष्य दांव पर
चर्चा है कि सीएम योगी के एक बेहद करीबी मंत्री का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है। वहीं, दिल्ली के करीबी माने जाने वाले एक कद्दावर मंत्री के विभागों में कटौती की जा सकती है। सूत्रों का दावा है कि तीन बड़े नेताओं के कामकाज में बड़े बदलाव होंगे और कुछ मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
इन नामों की खुल सकती है किस्मत
नए चेहरों की रेस में भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडे, अशोक कटारिया, पूजा पाल, श्रीकांत शर्मा, राजीव तरारा, कृष्णा पासवान और राजेश्वर सिंह के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। साथ ही, समाजवादी पार्टी के बागी विधायकों को भी उनके पाला बदलने का इनाम मिल सकता है।
प्रमुख बिंदु: क्या होगा खास?
5 से 7 नए चेहरे: मंत्रिमंडल में पांच से सात नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है।
प्रमोशन और फेरबदल: बेहतर प्रदर्शन करने वाले कुछ मंत्रियों का प्रमोशन होगा, जबकि कई धुरंधर नेताओं के पर कतरे जा सकते हैं।
विभागों में बदलाव: पुराने मंत्रियों के पोर्टफोलियो (विभाग) में व्यापक बदलाव की संभावना है।
अब देखना यह है कि इस "सर्जिकल स्ट्राइक" जैसे फेरबदल के बाद किन दिग्गजों का कद बढ़ता है और किन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए अगला 48 घंटा बेहद निर्णायक होने वाला है।
