आरोपी दीपक यादव पर एससी-एसटी एक्ट समेत बीएनएस की 6 गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
गाजियाबाद (कवि नगर): जिले के थाना कवि नगर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आरटीओ (RTO) ऑफिस में शनिवार को एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज वारदात सामने आई है. यहां मेरठ के रहने वाले एक अनुसूचित जाति के युवक पर सरेआम भारी 'पंच' से हमला कर उसका दांत तोड़ दिया गया और चेहरे पर गंभीर चोटें पहुंचाई गईं. आरोपी ने पीड़ित को सरेआम बेहद अपमानजनक जातिसूचक शब्द कहे और खुद को इलाके का गुंडा बताते हुए जान से मारने की धमकी दी.
कवि नगर थाना पुलिस ने पीड़ित की लिखित शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बम्हैटा निवासी आरोपी दीपक यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और एससी-एसटी (नृशंसता निवारण) अधिनियम की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस हाई-प्रोफाइल केस की कमान खुद पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) कवि नगर / डिप्टी एसपी (Dy. SP) संभाल रहे हैं.
क्या है पूरा मामला? (लगाए गए आरोप)
पुलिस को दी गई लिखित तहरीर में पीड़ित सचिन कुमार (पुत्र बाबूराम, निवासी शिवलोकपुरी, कंकरखेड़ा, मेरठ) ने बताया कि वह 23 मई 2026 को किसी काम से आरटीओ ऑफिस गाजियाबाद आए थे. वहां बम्हैटा गांव का रहने वाला दीपक यादव (पुत्र/रिश्तेदार विवरण अज्ञात) उन्हें मिल गया, जो पीड़ित को पहले से जानता था.
जातिसूचक अपमान: पीड़ित का आरोप है कि दीपक यादव ने उन्हें देखते ही सरेआम 'चमार-चमेटा' जैसे घोर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गंदी-गंदी गालियां देना शुरू कर दिया.
जानलेवा हमला: विरोध करने पर आरोपी ने अपने हाथ में पहने भारी 'पंच' से सचिन के चेहरे पर जोरदार प्रहार किया. इस घातक हमले से पीड़ित के चेहरे और नाक के अंदरूनी हिस्से में गंभीर चोटें आईं और उनका एक दांत भी टूट गया.
गुंडागर्दी और धमकी: मारपीट के दौरान आरोपी ने चिल्लाते हुए कहा कि वह 'बम्हैटा का गुंडा' है. उसने पीड़ित को पहले भी धमकाया था और इस बार भी सरेआम जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गया.
दर्ज की गई धाराएं और उनमें मिलने वाली सजा का पूरा ब्यौरा:
पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कुल 6 विशेष धाराओं (BNS की 5 और SC/ST एक्ट की 1) के तहत एफआईआर संख्या 0323/2026 दर्ज की है. इन सभी धाराओं में आरोपी पर लगे आरोपों की गंभीरता और कानूनन मिलने वाली अधिकतम सजा का विवरण नीचे दिया जा रहा है:
1. भारतीय न्याय संहिता (BNS) - धारा 115(2)
यह अपराध क्या है: स्वेच्छा से किसी अन्य व्यक्ति को चोट या साधारण ठेस पहुंचाना.
कितनी सजा होगी: इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को 1 वर्ष तक का कारावास (जेल), या ₹10,000 तक का आर्थिक जुर्माना, अथवा दोनों भुगतने पड़ सकते हैं.
2. भारतीय न्याय संहिता (BNS) - धारा 352
यह अपराध क्या है: शांति भंग करने या दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर किसी का घोर अपमान करना या अपशब्द कहना.
कितनी सजा होगी: अदालत में आरोप सिद्ध होने पर इसमें 2 वर्ष तक की जेल की सजा, या जुर्माना, अथवा दोनों का प्रावधान है.
3. भारतीय न्याय संहिता (BNS) - धारा 351(3)
यह अपराध क्या है: किसी को जान से मारने या गंभीर चोट (जैसे अंग-भंग करने) की आपराधिक धमकी देना.
कितनी सजा होगी: चूंकि आरोपी ने जान से मारने की धमकी दी है, इसलिए यह धारा बेहद गंभीर है, जिसमें दोषी को 7 वर्ष तक का कठोर कारावास या जुर्माना, या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं.
4. भारतीय न्याय संहिता (BNS) - धारा 118(1)
यह अपराध क्या है: खतरनाक हथियारों, औजारों या साधनों (जैसे इस मामले में 'भारी पंच') का उपयोग करके स्वेच्छा से किसी को गंभीर चोट (Grievous Hurt) पहुंचाना. कानूनन दांत का टूटना गंभीर चोट की श्रेणी में आता है.
कितनी सजा होगी: यह एक गैर-जमानती और बेहद गंभीर धारा है. इसमें दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की जेल (कठोर कारावास) और भारी जुर्माने की सजा का स्पष्ट प्रावधान है.
5. भारतीय न्याय संहिता (BNS) - धारा 131
यह अपराध क्या है: किसी व्यक्ति को बिना सोचे-समझे या बिना किसी बड़ी उकसावे के जानबूझकर गंभीर रूप से प्रताड़ित करना या आघात पहुंचाना.
कितनी सजा होगी: मामले की गंभीरता और चोट की प्रकृति के आधार पर इसमें न्यायालय द्वारा जुर्माना या उचित अवधि का कारावास तय किया जाता है.
6. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम, 1989 - धारा 3(2)(va)
यह अपराध क्या है: किसी अनुसूचित जाति (SC) के व्यक्ति के साथ सिर्फ उसकी जाति के कारण भेदभाव करना, उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करना और उसके खिलाफ ऐसा अपराध करना जिसमें BNS के तहत 10 वर्ष से कम की सजा का प्रावधान हो.
कितनी सजा होगी: इस विशेष एक्ट के जुड़ने से मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है. इसके तहत ऊपर दी गई BNS की धाराओं में मिलने वाली सजा और ज्यादा सख्त हो जाती है और आरोपी को कानूनन अधिकतम तय सीमा तक जेल की हवा खानी पड़ सकती है. यह पूरी तरह गैर-जमानती धारा है.
पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई:
कवि नगर थाना प्रभारी (इंस्पेक्टर) के निर्देश पर मामले की जीडी (General Diary) एंट्री कर केस दर्ज कर लिया गया है. कानून के मुताबिक, एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के कारण इस मामले की विवेचना सीधे क्षेत्राधिकारी (CO) स्तर के राजपत्रित अधिकारी (डिप्टी एसपी) को सौंपी गई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरटीओ परिसर जैसे सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की गुंडागर्दी और जातिगत उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. आरोपी दीपक यादव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं और जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.
