गुरसहायगंज/कन्नौज। क्षेत्र के ग्राम चित्तरपुर्वा मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवेंदिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिक रस का अनुभव किया। यह कथा रामविलास पाल एवं श्रीमती कमलेश कुमार पाल के संयोजन में चल रही है। कथा वाचक आचार्य पं0 प्रेमसागर पाण्डेय ने अपने प्रवचनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथा के दौरान भागवत आचार्य ने गोपी गीत, महारास लीला, कंस उद्धार और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों का प्रेम सांसारिक नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।
गोपी गीत का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि जब भक्त अपने आराध्य के वियोग में तड़पता है, तभी उसके हृदय में सच्ची भक्ति का उदय होता है। गोपियों की कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति प्रत्येक साधक के लिए एक आदर्श है।
रास लीला के प्रसंग में उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण प्रत्येक भक्त के हृदय में विराजमान हैं और भक्त की भावना के अनुरूप उन्हें दर्शन देते हैं। कंस उद्धार के माध्यम से अहंकार और अत्याचार के निश्चित अंत तथा धर्म की सदैव विजय का संदेश दिया गया। रुक्मिणी विवाह की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथा वाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक ज्ञान का भंडार है। उन्होने यह भी कहा कि कथा का श्रवण करना परमात्मा से साक्षात्कार करने के समान है और इसके संदेशों को जीवन में अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल बना सकता है। कार्यक्रम में इन्द्र पाल, रामबाबू, शिवरतन, घनश्याम, अर्पित पाल, रामरतन, हरीबाबू, आनन्द पाल, देवेन्द्र पाल सहित सैकड़ो की संख्या मे श्रद्धालू मौजूद रहे।
