प्रतापगढ़। जिले में जिला कृषि रक्षा अधिकारी अनिल प्रसाद मिश्र ने बुधवार को खरीफ वर्ष 2026 के मद्देनजर कृषि विभाग ने किसानों को धान की नर्सरी डालने से पहले बीज शोधन एवं भूमि शोधन करने की सलाह दी है। उन्होने बताया कि धान की फसल में लगने वाले अधिकांश रोग बीज, मिट्टी, वायु एवं कीटों के माध्यम से फैलते हैं। ऐसे में बीज जनित रोगों से बचाव के लिए बीज शोधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने पिछले वर्षों में बीज शोधन अपनाया, उनकी फसलों में रोगों का प्रकोप कम देखने को मिला। इसलिए किसानों को बीज शोधन एवं भूमि शोधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि आगामी फसल सुरक्षित और बेहतर उत्पादन देने वाली हो सके।
उन्होने बताया है कि बीज को रातभर पानी में भिगोने के बाद अगले दिन अतिरिक्त पानी निकाल दें। इसके बाद 2.5 से 3 ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत या थीरम 75 प्रतिशत अथवा 4 से 5 ग्राम ट्राइकोडर्मा वायो रसायन प्रति किग्रा बीज की दर से 5 लीटर पानी में 10 ग्राम गुड़ के साथ घोलकर बीज में मिला दिया जाये इसके बाद छाया में अंकुरित होने तक रखा जाये, तत्पश्चात् नर्सरी डाली जाये। भूमि शोधन के लिए 2.5 किलोग्रामध्हेक्टेयर या ब्यूबेरिया बैसियाना बायो रसायन को 75 किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर 10 से 12 दिन तक छायादार स्थान पर रखें तथा बीच-बीच में पानी का छिड़काव करते रहें। तत्पश्चात् इस 75 किग्रा0 गोबर की खाद जो कि बायो पेस्टीसाइड में तब्दील हो चुका है, इसे जुताई करके खेत में मिला दें इससे खेत में मौजूद दीमक एवं फफूंद से छुटकारा मिलेगा, साथ ही साथ खेत में जैविक खाद की कमी भी पूर्ण हो जायेगी। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि बीज शोधन एवं भूमि शोधन में प्रयोग होने वाले रसायन कृषि रक्षा इकाइयों पर 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध हैं। उन्होंने किसानों को यह भी अवगत कराया कि अनुदान का लाभ केवल पंजीकृत किसानों को ही मिलेगा तथा अनुदान की धनराशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के खाते में भेजी जाएगी।

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