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बलियाः मधुरता, विद्वता और विनम्रता की मिसाल थे प्रो. रामसुंदर राय! गणित, संगीत और साहित्य की त्रिवेणी थे टीडी कॉलेज के पूर्व प्राध्यापक


बलिया। टीडी कॉलेज के गणित विभाग के पूर्व प्राध्यापक प्रोफेसर डॉ. रामसुंदर राय के निधन से जनपद का शैक्षिक, साहित्यिक और सांगीतिक जगत शोकाकुल है। 86 वर्ष की आयु में उनका निधन केवल एक शिक्षक का अवसान नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व की विदाई है, जिसने अपने ज्ञान, सरलता और मधुर व्यवहार से अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित किया। हिंदी प्रचारिणी सभा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने उन्हें बहुआयामी प्रतिभा और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में याद किया।

बता दें कि सभा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. भोला प्रसाद आग्नेय ने कहा कि डॉ. राय केवल गणित के प्रवक्ता नहीं थे, बल्कि संगीत के कुशल प्रशिक्षक और संस्कृत के प्रकांड विद्वान भी थे। उन्होंने शिक्षा और संस्कृति दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

उनके सहपाठी महर्षि अशोक ने छात्र जीवन के संस्मरण साझा करते हुए कहा कि हिंदी प्रचारिणी सभा को आगे बढ़ाने में प्रो. राय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। वे हमेशा साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करते थे और नई प्रतिभाओं को मंच देने में आगे रहते थे।

डॉ. शशी प्रेमदेव ने कहा कि डॉ. राय का स्वभाव अत्यंत सहज और प्रेरणादायी था। जनपद के अनेक वरिष्ठ एवं युवा गायकों की प्रतिभा को निखारने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे संगीत को केवल कला नहीं, बल्कि संस्कार मानते थे।

विजय मिश्र ने कहा कि उच्च पद और सम्मान प्राप्त करने के बावजूद उनके व्यक्तित्व में कभी अहंकार नहीं आया। वे सभी से आत्मीयता और विनम्रता के साथ मिलते थे।

डॉ. नवचंद्र तिवारी ने भावुक होकर कहा कि हिंदी प्रचारिणी सभा के कार्यक्रमों में वे नई रचनाओं को सुनकर हमेशा हौसला अफजाई करते थे। उनका प्रोत्साहन युवा रचनाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत था।

पूर्व प्रधानाचार्य रामेश्वर सिंह ने कहा कि डॉ. राय सभी को समान स्नेह और सम्मान देने वाले दुर्लभ व्यक्तित्व थे। श्रद्धांजलि सभा में पंडित राजकुमार मिश्रा, डॉ. अरविंद उपाध्याय और काशी ठाकुर ने हारमोनियम पर निर्गुण एवं भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भावुक बना दिया।

इस दौरान डॉ. राजेंद्र भारती, शंकर शरण, श्वेता पांडेय मिश्रा, सुशीला पाल और इमामुद्दीन सहित अनेक लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। अंत में सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। सभा का संचालन मोहन जी श्रीवास्तव ‘सत्यांश’ ने किया।

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