- भारत सरकार से समय रहते कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली / डिजिटल डेस्क! (विनेश ठाकुर विधान केसरी)
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पिछले कुछ दिनों से तेजी से चर्चा में आए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) पेज और इसके संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर इंटरनेट पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मूल रूप से महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से ताल्लुक रखने वाले और वर्तमान में अमेरिका (USA) में रह रहे दिपके पर सोशल मीडिया यूज़र्स द्वारा बॉट्स (कृत्रिम फॉलोअर्स) खरीदने, पीआर स्टंट करने और देश विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
मात्र 5 दिनों में लाखों फॉलोअर्स का दावा, उठे सवाल
डिजिटल विश्लेषकों और यूज़र्स ने इस बात पर हैरानी जताई है कि जिस पेज की शुरुआती पोस्ट्स पर फॉलोअर्स के अनुपात में ऑर्गेनिक प्रतिक्रियाएं नहीं थीं, उसने महज 5 दिनों के भीतर लाखों का आंकड़ा पार कर लिया। इंटरनेट विशेषज्ञों के मुताबिक, फॉलोअर्स और पोस्ट एंगेजमेंट के बीच का यह भारी असंतुलन सीधे तौर पर 'पेड पीआर' और भारी मात्रा में बॉट फॉलोअर्स खरीदने की ओर इशारा करता है। इस कृत्रिम लोकप्रियता के लिए मोटी रकम खर्च किए जाने के दावे भी किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर नेटिजन्स यह भी दावा कर रहे हैं कि इस अकाउंट के कई फॉलोअर्स संदिग्ध विदेशी प्रोफाइलों से जुड़े हैं।
राजनीतिक जुड़ाव और नैरेटिव सेट करने का आरोप
आरोपों के मुताबिक, अभिजीत दिपके साल 2018 से आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ जुड़े रहे हैं और दिल्ली में सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) व वरिष्ठ नेताओं के साथ भी काम कर चुके हैं। सोशल मीडिया यूज़र्स का कहना है कि वे निष्पक्ष होने का मुखौटा पहनकर देश के युवाओं (विशेषकर Gen Z) के गुस्से का फायदा उठा रहे हैं। उन पर जातिगत राजनीति को बढ़ावा देने, सामान्य वर्ग (GCs) को निशाना बनाने और देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करने के आरोप लग रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार विनेश ठाकुर 'कपूर्री' का तीखा हमला:
"नेपाल जैसी स्थिति बनाने की कोशिश"
इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार और प्रबुद्ध नागरिक विनेश ठाकुर 'कपूर्री' ने अपना कड़ा बयान जारी करते हुए केंद्र सरकार और देश के युवाओं को आगाह किया है। विनेश ठाकुर 'कपूर्री' ने कहा "ऐसे भ्रामक और संदिग्ध नैरेटिव चलाने वाले लोगों से देश के युवाओं को बेहद सावधान रहने की आवश्यकता है। यह नैरेटिव फैलाने वाला व्यक्ति विदेशों में बैठकर भारत को कटघरे में खड़ा कर रहा है और देश के शीर्ष नेताओं व संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की एक गहरी साजिश रच रहा है। इनके इरादे भारत में भी नेपाल जैसी अस्थिर स्थिति पैदा करने के दिखाई देते हैं। केंद्र सरकार को इस पूरे नैरेटिव के पीछे की फंडिंग और विदेशी ताकतों की भूमिका को लेकर तुरंत सावधान होना चाहिए और इसकी उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए।"
चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन और कानूनी कार्रवाई की मांग
इस विवाद के बीच नेटिजन्स और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यह पूरा अभियान 'देश को बदनाम करने की एक सोची-समझी योजना' का हिस्सा है। सोशल मीडिया पर यह मांग तेजी से उठ रही है कि भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) को इस तरह के किसी भी संदिग्ध, गैर-गंभीर और विवादित नाम वाले संगठन को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत (Registration) करने की अनुमति कतई नहीं देनी चाहिए। इसके साथ ही, इंटरनेट पर एक बड़ा वर्ग सरकार और जांच एजेंसियों से इस पूरे मामले की गहन जांच करने और विदेशी धरती से चलाए जा रहे इस संदिग्ध नैरेटिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग कर रहा है। यूज़र्स का आरोप है कि विदेशी मंचों पर चर्चा और 'ट्रॉफी' पाने की चाह में देश के भीतर सामाजिक विद्वेष फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।
डिजिटल साक्षरता की अपील:
इंटरनेट पर बढ़ रहे इस विवाद के बीच तकनीकी विशेषज्ञों ने देश के युवाओं और सोशल मीडिया यूज़र्स से अपील की है कि वे किसी भी तेजी से बढ़ते अकाउंट या नैरेटिव पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी भड़काऊ कंटेंट को शेयर या सपोर्ट करने से पहले उसके पीछे के फंडिंग सोर्स, पीआर नेटवर्क और असली इरादों की जांच करना बेहद जरूरी है।
