संग्रामपुर: प्रधान बने प्रशासक तो सचिव का बढ़ा महत्व
May 27, 2026
संग्रामपुर/अमेठी। उत्तर प्रदेश में ग्राम का 5 वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद योगी सरकार ने पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रखने के लिए निर्वतमान प्रधानों को ही प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेशन) नियुक्त कर दिया है। जिससे गांव की निरंतरता बनी है।नई व्यवस्था में ग्राम पंचायत का कार्यकाल 6 महीना बढ़ गया है पंचायत चुनाव तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। लेकिन प्रधान प्रशासक बने तो लेकिन ग्राम सचिव की जिम्मेदारी बढ़ गई। ग्राम पंचायत सचिव ग्राम पंचायत का एक सरकारी नियुक्त अधिकारी हैं प्रशासक के रूप में काम कर रहे प्रधानो के पास वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार होते हुए भी योजनाओं की तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने जैसे डिजिटल रिकॉर्ड भुगतान,बिल -वाउचर का प्रबन्धन सचिव के ही हाथ में रहेगा।इसके अलावा सरकारी दिशानिर्देश योजनाओं के नियमों और पंचायत की बैठकों के संचालक के लिए सचिव के हाथ में रहेगा।धन का उपयोग करने और सरकारी लेखा-जोखा रखने में सचिव की भूमिका सबसे अधिक हो जाती है।कुल मिलाकर देखा जाए प्रधानों के प्रशासक बनने से गांव की राजनीति और नेतृत्व में निरंतरता आती रहेगी लेकिन आधिकारिक और कागजी कार्रवाई का काम ग्राम पंचायत सचिवों के साथ में ही रहेगा।नई व्यवस्था के बीच चेहरे को जिम्मेदारी की उमंग के जिले के खंड विकास कार्यालय संग्रामपुर पहुंचे ग्राम पंचायत व ग्राम विकास सचिवों ने अपने -अपने क्षेत्र में जाकर (आई जी आर एस) से आई शिकायतों का निस्तारण के लिये भौतिक निरीक्षण किया। मिथिलेश कुमार यादव ने संग्रामपुर क्षेत्र के मल्लू पुर गांव में नाली निकासी की शिकायत पर स्थलीय निरीक्षण किया।सुनील कुमार ने ग्रामसभा भवसिंहपुर पंचायत भवन पर बैठकर जनसुनवाई की , मिथिलेश कुमार ने तारापुर गांव में जाकर स्थाई गौशाला में संरक्षित पशुओं के लाने से पहले पेयजल - भूसा - बिजली पानी की व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया।इसी प्रकार सभी ग्राम पंचायत अधिकारी - ग्राम विकास अधिकारी नये उत्साह के साथ अपने - अपने क्षेत्रीय गांव के पंचायत भवन मौकाए शिकायत स्थल जाकर अपनी जिम्मेदारी से आम जनता को रूबरू कराया।

