प्रतापगढ़। जिले में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बुधवार को बताया है कि उत्तर प्रदेश गुणवत्तापरक ऊन का उत्पादन बढ़ाने एवं ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर प्रदान करने हेतु भेंड़ पालन को बढ़ावा दिये जाने एवं भेंड़ पालन पर आश्रित परिवारों की आय में वृद्धि करने एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये भेड़ पालन योजना (रा0यो0) का शुभारम्भ किया गया है। जनपद प्रतापगढ़ में इस योजना के अन्तर्गत 05 इकाईयों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजनान्तर्गत लाभार्थी के द्वारा 20 मादा भेंड़ें एवं 01 नर मेढ़ा की इकाई की स्थापना की जानी है। जिसके तहत प्रति इकाई 170000 रूपये निर्धाारित है। जिसमें लाभार्थी अंश 10 प्रतिशत (17000) स्वयं लाभार्थी द्वारा व्यय किया जायेगा एवं राज्यांश 90 प्रतिशत (153000) का राज्य द्वारा अनुदान दिया जायेगा। योजना का लाभ लेने के लिये आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए एवं लघु, सीमान्त अथवा भूमिहीन कृषक होना चाहिए। भेंड़ पालक के पास भेंड़ो को रखने का पर्याप्त स्थान होना आवश्यक है। पारम्परिक भेंड़ पालको एवं भेंड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर जनपद-टोंक राजस्थान व केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मखदमू, फरह मथुरा उत्तर प्रदेश के साथ भेंड़-बकरी पालन प्रशिक्षण इटावा से प्रशिक्षण प्राप्त आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर चयनित किया जायेगा।
उन्होने बताया है कि आवेदन पत्र के साथ आधार कार्ड अथवा स्थायी निवास प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, बैंक पासबुक की छायाप्रतिध्कैसिल चेक, भेंड़ पालन से सम्बन्धित प्रशिक्षण प्रमाण पत्र तथा शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र, योजनान्तर्गत न्यूनतम 03 वर्ष तक भेंड़ पालन करने हेतु शपथ पत्र अनिवार्य है। इच्छुक पात्र व्यक्ति अधिक जानकारी हेतु अपने निकटतम पशु चिकित्सालयध्मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यलय विकास भवन प्रतापगढ़ से सर्म्पक कर सकते है। आवेदन प्राप्त करने की अन्तिम तिथि 31.05.2026 है।
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