Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

पीलीभीतः एक ही व्यक्ति की रिपोर्टों में बड़ा अंतर, फैटी लिवर को लेकर बढ़ी चिंता! कहीं ग्रेड-3 तो कहीं ग्रेड-1 की पुष्टि, डायग्नोस्टिक सेंटरों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल


पीलीभीत। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक चैंकाने वाला मामला सामने आया है। एक ही मरीज की अलग-अलग स्थानों से कराई गई अल्ट्रासाउंड जांच रिपोर्टों में भारी अंतर पाए जाने से न केवल मरीज बल्कि उसके परिजन भी असमंजस में हैं। इस घटना ने निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों की विश्वसनीयता और जांच प्रक्रिया की सटीकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, मोहल्ला छोटा निवासी पत्रकार मुकेश कुमार ने पेट में हल्के दर्द की शिकायत के चलते चिकित्सकीय परामर्श लिया। प्रारंभिक उपचार के बाद भी असहजता बनी रहने पर उन्हें अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दी गई। इसी क्रम में 24 अप्रैल 2026 को टनकपुर रोड स्थित सत्यम डायग्नोस्टिक सेंटर पर जांच कराई गई। बताया जाता है कि जांच के दौरान वहां मौजूद चिकित्सक ने उन्हें फैटी लिवर (ग्रेड-3) जैसी गंभीर स्थिति बताई और यहां तक कहा कि उनका लिवर लगभग क्षतिग्रस्त हो चुका है। साथ ही भविष्य में लिवर प्रत्यारोपण तक की आवश्यकता पड़ने की आशंका जताई गई। इस जानकारी से मरीज गहरे मानसिक तनाव में आ गया और कई दिनों तक चिंता में रहा।

हालांकि, संदेह होने पर मुकेश कुमार ने कुछ दिन बाद शहर के ही एक अन्य निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर पुनः अल्ट्रासाउंड कराया, जहां रिपोर्ट में माइल्ड फैटी लिवर (ग्रेड-1) दर्शाया गया। इसके बाद भी स्थिति स्पष्ट न होने पर 28 अप्रैल 2026 को जिला अस्पताल में तीसरी बार जांच कराई गई, जिसमें भी हल्की सूजन की ही पुष्टि हुई।

तीनों रिपोर्टों के परिणामों में इतना बड़ा अंतर सामने आने के बाद मरीज और उसके परिजनों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर किस जांच को सही माना जाए। जहां एक रिपोर्ट गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर रही थी, वहीं अन्य दो रिपोर्टें सामान्य स्थिति की ओर संकेत कर रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट मशीन की गुणवत्ता, जांच करने वाले तकनीशियन के अनुभव और डॉक्टर की व्याख्या पर निर्भर करती है। बावजूद इसके, ग्रेड-1 और ग्रेड-3 जैसे बड़े अंतर को सामान्य नहीं माना जा सकता।

इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों और सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीजों को सही और भरोसेमंद रिपोर्ट मिल सके। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसी स्थिति में मरीज को किसी मान्यता प्राप्त और भरोसेमंद संस्थान में पुनः जांच करानी चाहिए। साथ ही फाइब्रोस्कैन जैसी उन्नत जांच के माध्यम से स्थिति की पुष्टि कराना बेहतर विकल्प हो सकता है। यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। यदि जांच रिपोर्ट ही संदिग्ध हों, तो सही उपचार की दिशा तय करना मुश्किल हो जाता है, जो मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि इस मामले को लेकर प्रार्थी ने जिला मुख्यचिकित्सा अधिकारी को इस पूरे मामले की जानकारी दी जिस पर उन्होंने प्राची से लिखित रूप में शिकायत देने की बात कही।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |