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पीलीभीतः किसानों की समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट में गरमाया माहौल! पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने किया जोरदार प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपकर उठाईं व्यापक मांगें


पीलीभीत। जनपद में किसानों की समस्याओं और कथित प्रशासनिक व राजनीतिक उत्पीड़न के मुद्दे को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। लंबे समय बाद सक्रिय रूप में नजर आए पूर्व राज्य मंत्री हेमराज वर्मा ने किसानों के समूह के साथ पहुंचकर प्रशासन और सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। इस दौरान परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया। प्रदर्शन के उपरांत पूर्व मंत्री के नेतृत्व में किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल सिटी मजिस्ट्रेट से मिला और राज्यपाल को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों के साथ-साथ एक किसान के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने आरोप लगाया कि ग्राम अण्डरायन निवासी किसान ललित वर्मा के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत जो मुकदमा दर्ज किया गया है, वह पूरी तरह से दबाव और पक्षपात का परिणाम है। उनका कहना था कि कृषि कार्यों के लिए रखे गए डीजल को आधार बनाकर किसान को निशाना बनाया जाना गलत है और इससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर मुकदमा वापस लेने की मांग रखी।

ज्ञापन में जनपद के किसानों की मौजूदा स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताया गया। किसानों ने कहा कि विभिन्न स्तरों पर उन्हें गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं।

कृषि कार्यों के लिए आवश्यक खाद की कमी के कारण फसलें प्रभावित हो रही हैं। समय पर खाद न मिलने से खेती की लागत बढ़ रही है और उत्पादन पर असर पड़ रहा है। शुगर मिलों द्वारा गन्ना भुगतान में भारी देरी हो रही है, जिससे किसानों का लगभग 253 करोड़ रुपये का बकाया फंसा हुआ है। आर्थिक संकट के चलते किसान कर्ज के बोझ में दबते जा रहे हैं। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण गेहूं उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन प्रभावित किसानों को अब तक कोई ठोस राहत या मुआवजा नहीं मिल पाया है। सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर तौल प्रक्रिया धीमी होने और अव्यवस्था के कारण किसानों को मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ रही है।

वर्ष 2024-25 में घोषित केसीसी ऋण राहत योजना का लाभ अभी तक धरातल पर लागू नहीं हो सका है, जिससे किसान आर्थिक रूप से परेशान हैं। इसके अलावा स्मार्ट मीटर प्रणाली को लेकर भी किसानों में नाराजगी जताई गई है। उनका आरोप है कि इससे बिजली बिल अनियंत्रित हो रहे हैं और आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।

पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो जिले में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही आर्थिक और कृषि संकट से जूझ रहा है, ऐसे में उसकी समस्याओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे जिन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर आक्रोश व्यक्त किया। किसानों का कहना था कि यदि उनकी समस्याओं पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की राजनीतिक और किसान संबंधी चर्चाओं को एक बार फिर तेज कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में प्रशासन और किसानों के बीच संवाद और भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

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