पीलीभीत। जनपद में पंचायत व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया है। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए अपने कार्यकाल को बढ़ाए जाने की मांग की है। प्रधानों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद यदि चुनाव में देरी होती है तो गांवों के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। ज्ञापन में प्रधानों ने बताया कि वे सभी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुने गए जनप्रतिनिधि हैं और अपने-अपने गांवों की समस्याओं, जरूरतों और विकास योजनाओं को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने निरंतर गांवों के विकास, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और जनसमस्याओं के समाधान के लिए काम किया है।
प्रधानों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि 26 मई को उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने वाला है, जबकि इस बात की चर्चा है कि आगामी पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाएंगे और उनमें देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिसे लेकर प्रधानों ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने अपने ज्ञापन में कहा कि पूर्व के अनुभवों के आधार पर जब पंचायतों में प्रशासकीय व्यवस्था लागू की गई थी, तब विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई थी और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठे थे। उनका मानना है कि गांव के चुने हुए प्रतिनिधि ही स्थानीय परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझते हैं और जनता के प्रति जवाबदेह रहते हैं, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से हो पाता है। ग्राम प्रधानों ने यह भी कहा कि यदि उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त किए जाते हैं, तो चल रहे विकास कार्यों में बाधा आ सकती है और ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने अनुरोध किया कि आगामी पंचायत चुनाव होने तक वर्तमान प्रधानों को ही कार्य करने का अवसर दिया जाए।
ज्ञापन के अंत में प्रधानों ने यह उम्मीद जताई कि प्रशासन जनहित और गांवों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगा। इस घटनाक्रम के बाद जिले में पंचायत चुनाव और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
