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ईरान-अमेरिका के बीच होर्मुज में फिर तनाव बढ़ने के बाद उत्तर कोरिया ने दागी कई बैलिस्टिक मिसाइलें


ईरान-अमेरिका के बीच होर्मुज में दोबारा नाकाबंदी लागू होने से तनाव बढ़ने के दौरान उत्तर कोरिया ने एक साथ कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर हड़कंप मचा दिया है। इस घटना के बाद जापान में नेशनल इमरजेंसी की घोषणा कर दी गई है। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स पर एक पोस्ट के दौरान उत्तर कोरिया द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने के बाद नेशनल इमरजेंसी का ऐलान किया।

बताया जा रहा है कि युक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी संगठन (आईएईए) की पूर्व चेतावनियों से बेफिक्र होकर उत्तर कोरिया ने रविवार को समुद्र की ओर एक साथ छोटी दूरी की कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अभी कुछ दिन पहले ही यूएन ने चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया परमाणु हथियार बनाने में “बहुत गंभीर” प्रगति कर रहा है। इस घटना के बाद दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ ने बताया कि उत्तर कोरिया के सिन्पो क्षेत्र से दागी गई मिसाइलें पूर्वी समुद्र की ओर लगभग 140 किलोमीटर (87मील) की दूरी तक चलीं। दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह उत्तर कोरिया के किसी भी उकसावे को जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और इस मामले में अमेरिका तथा जापान के साथ लगातार जानकारी का आदान-प्रदान कर रहा है।

दक्षिण कोरिया ने वरिष्ठ अधिकारियों की एक आपात राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई गई। इस दौरान अधिकारियों ने उत्तर कोरिया के बार-बार बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों पर गहरी चिंता जताई और तुरंत इन्हें रोकने की मांग की। रविवार का यह प्रक्षेपण दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के भारत और वियतनाम की यात्रा पर रवाना होने से कुछ घंटे पहले हुआ। अमेरिकी और जापानी सेनाओं ने भी इन प्रक्षेपणों का पता लगाया। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड ने कहा कि वह क्षेत्र में अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

घटना के बाद जापान के रक्षा मंत्रालय ने प्योंगयांग के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज की और कहा कि ये प्रक्षेपण क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हैं, जो उत्तर कोरिया को किसी भी प्रकार की बैलिस्टिक गतिविधि करने से मना करते हैं। सिन्पो उत्तर कोरिया का पूर्वी तटीय शहर है, जहां से यह मिसाइलें दागी गईं। यह पनडुब्बियों के निर्माण का बड़ा शिपयार्ड भी है। दक्षिण कोरिया की सेना इस बात का विश्लेषण कर रही है कि क्या ये मिसाइलें पनडुब्बी से, जमीन-आधारित लॉन्चर से या दोनों प्लेटफॉर्म से दागी गईं। अगर ये पनडुब्बी से दागी गईं तो यह चार वर्षों में उत्तर कोरिया का पहला सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण होगा। पनडुब्बी से मिसाइल दागने की क्षमता बढ़ने से उत्तर कोरिया के विरोधी देशों के लिए पहले से पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाएगा, जो एक चिंताजनक विकास माना जा रहा है।

पिछले साल उत्तर कोरिया ने पहली बार एक परमाणु-संचालित पनडुब्बी के निर्माण का खुलासा किया था। रविवार का प्रक्षेपण इस वर्ष उत्तर कोरिया के हथियार परीक्षणों की शृंखला में नवीनतम है। पिछले सप्ताह उत्तर कोरिया ने कहा था कि नेता किम जोंग उन ने देश के डिस्ट्रॉयर से मिसाइल परीक्षणों की निगरानी की। उससे पहले वाले सप्ताह में क्लस्टर-बम वारहेड वाले बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य नई हथियार प्रणालियों के परीक्षण किए गए थे।पिछले महीने उत्तर कोरिया ने अमेरिकी मुख्य भूमि तक पहुंचने वाली मिसाइलों के लिए अपग्रेडेड सॉलिड-फ्यूल इंजन का परीक्षण किया था।

वर्ष 2019 में अमेरिका के तत्कालीन और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ परमाणु कूटनीति के विफल होने के बाद से ही किम जोंग उन ने अपने परमाणु और मिसाइल शस्त्रागार को लगातार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया था। हालांकि ट्रंप ने हाल ही में किम के साथ कूटनीति बहाल करने की इच्छा दोहराई है। उत्तर कोरिया के नेता ने हाल में ट्रंप के साथ बातचीत का दरवाजा खुला रखा है, लेकिन अमेरिका से परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्त हटाने की मांग की है।

ट्रंप मई में बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पुनर्निर्धारित शिखर बैठक के लिए जा रहे हैं। कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि उत्तर कोरिया के हालिया परीक्षण अमेरिका के साथ भविष्य की बातचीत में अपनी मजबूत स्थिति बनाने के लिए किए गए हैं। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने कहा कि उनकी एजेंसी ने उत्तर कोरिया के परमाणु निर्माण सुविधाओं में “तेज वृद्धि” की पुष्टि की है।

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