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चीन-पाकिस्तान की बढ़ी धुकधुकी! भारत बनेगा ‘न्यूक्लियर सुपरपावर’ शुरू किया 'जादुई' परमाणु रिएक्टर


भारत ने अपनी परमाणु यात्रा में एक ऐसा कदम उठा लिया है, जो आने वाले दशकों की ऊर्जा तस्वीर बदल सकता है. तमिलनाडु के कलपक्कम में 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को क्रिटिकलिटी हासिल कर ली और इसके साथ ही भारत ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण में औपचारिक एंट्री कर ली है. यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर वैज्ञानिक क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा के बड़े विजन का संकेत है.

इसका मतलब है कि रिएक्टर में अब एक स्थिर और नियंत्रित न्यूक्लियर चेन रिएक्शन शुरू हो गया है, जहां हर फिशन अगली प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है. यह उपलब्धि पावर जनरेशन टेस्टिंग की शुरुआत का संकेत है. इसके साथ ही भारत अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण के और करीब पहुंच गया है, जो थोरियम आधारित ईंधन से ज्यादा ऊर्जा पैदा करने पर केंद्रित है

दरअसल, भारत का तीन-चरणीय न्यूक्लियर प्रोग्राम लंबे समय से थोरियम पर आधारित है और PFBR इसी रणनीति की रीढ़ है. अब पावर जनरेशन टेस्टिंग शुरू होने के साथ भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की तरफ तेजी से बढ़ रहा है. यह उपलब्धि सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि भारत के तेजी से उभरते ‘न्यूक्लियर सुपरपावर’ बनने की दिशा में बड़ा कदम है. PFBR की खासियत है कि यह जितना ईंधन खपत करता है, उससे ज्यादा पैदा कर सकता है यानी ऊर्जा के साथ भविष्य का ईंधन भी तैयार.

इस कदम के दूरगामी असर साफ हैं. एक तरफ भारत अपनी वैज्ञानिक और रणनीतिक ताकत दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ एशिया में शक्ति संतुलन भी बदलता नजर आ रहा है. चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह संकेत है कि भारत अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक न्यूक्लियर ताकत बनने की राह पर है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की परमाणु यात्रा में 'निर्णायक कदम' बताया. उन्होंने कहा, 'आज भारत अपनी सिविल न्यूक्लियर यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है, जो हमारे न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण को आगे बढ़ाता है. कलपक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है. यह एडवांस्ड रिएक्टर, जो जितना ईंधन खपत करता है उससे ज्यादा पैदा करने में सक्षम है, हमारी वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग ताकत की गहराई को दर्शाता है. यह हमारे तीसरे चरण में विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में निर्णायक कदम है. भारत के लिए गर्व का पल है. हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स को बधाई.

विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, 'कलपक्कम प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का क्रिटिकल होना हमारे सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए एक ऐतिहासिक माइलस्टोन है. यह हमारी बढ़ती घरेलू क्षमताओं का भी प्रमाण है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा का रास्ता तैयार कर रही हैं. इस महत्वपूर्ण अवसर पर हमारे वैज्ञानिक समुदाय, इंजीनियर्स और सभी योगदानकर्ताओं को बधाई.'

इस रिएक्टर की खासियत यह है कि यह जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा पैदा करता है, यानी ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ भविष्य के लिए ईंधन भी तैयार करता है. यही तकनीक भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बना सकती है. आज जब दुनिया क्लीन और सस्टेनेबल एनर्जी की ओर बढ़ रही है, भारत का यह कदम उसे वैश्विक न्यूक्लियर पावर क्लब में और मजबूत स्थिति देता है. यह सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि रणनीतिक बढ़त भी है.

कलपक्कम से उठी यह ‘क्रिटिकल’ खबर साफ संकेत दे रही है कि भारत अब परमाणु ऊर्जा के नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहां आत्मनिर्भरता, तकनीक और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा एक साथ आगे बढ़ रही हैं.

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