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अमेठीः अपनी लहुरी काशी के शिल्पी राजर्षि रणंजय सिंह को 125वीं जयंती पर दी भावभीनी श्रद्धांजलि


अमेठी। लोकआस्था के प्रतीक और सेवा व त्याग के पर्याय राजर्षि रणंजय सिंह की 125वीं जयंती आज अमेठी नगर में अभूतपूर्व उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर राजर्षि तिराहे स्थित उनकी भव्य प्रतिमा के समक्ष सुबह से ही श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरा क्षेत्र राजर्षि अमर रहें के उद्घोष से गुंजायमान रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और मौन नमन के साथ हुआ। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, बीडीसी सदस्यों, युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने पुष्प अर्पित कर श्युगपुरुषश् को नमन किया। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजर्षि जी ने अमेठी को ष्लहुरी काशीष् के रूप में स्थापित कर शिक्षा, संस्कृति और गौ-संवर्धन के जो प्रतिमान स्थापित किए, वे आज भी प्रासंगिक हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर राजर्षि जी के पौत्र श्री अनंत विक्रम सिंह एवं उनकी धर्मपत्नी शाम्भवी अनंत विक्रम सिंह ने भावविभोर होकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। अनंत विक्रम सिंह ने कहा, बाबा जी का जीवन हमारे लिए एक जीवंत मार्गदर्शक है। हम उनके अधूरे सपनों और जनसेवा के संकल्पों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। शाम्भवी अनंत विक्रम सिंह ने कहा, राजर्षि जी द्वारा दी गई सेवा और त्याग की सीख युगों-युगों तक समाज का पथ प्रदर्शन करती रहेगी। कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी आगंतुकों और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अमेठी के इतिहास में यह 125वीं जयंती जनसेवा और जनसमर्थन के एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हुई।

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