सोनभद्र। खनिज संपदा से भरपूर जनपद सोनभद्र में राख और कोयला परिवहन का काम लगातार जारी है। लेकिन सवाल काम के जारी रहने का नहीं बल्कि उसमें हो रही खुली लापरवाही का है।हाल ही में हुई दुर्घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध जरूर किया लेकिन हकीकत ये है कि परिवहन कभी रुका ही नहीं, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर बदस्तूर जारी है।तस्वीरें साफ बता रही हैं कि राख से लदी हाइवा से सड़क पर बहता पानी अब लोगों की जान पर आफत बन चुका है।इसी सप्ताह ओवरलोड और नियम विरुद्ध परिवहन की वजह से दो लोगों की मौत हो चुकी है एक कोयला वाहन से और दूसरी राख परिवहन में लगी गाड़ी से।इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। इन तस्वीरों को ध्यान से देखिए राख से भरी हाइवा से लगातार पानी सड़क पर गिर रहा है यह राख मिश्रित स्लरी सड़क को इस कदर फिसलन भरा बना रही है कि दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा खतरे में हैं।जरा सी लापरवाही और सीधा हादसा यही अब इन सड़कों की हकीकत बन चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अनपरा और शक्तिनगर आसपास के इलाकों से निकलने वाले राख परिवहन में भारी अनियमितताएं हैं ओवरलोडिंग आम बात है, गाड़ियों को सुरक्षित तरीके से कवर नहीं किया जाता और पानी लगातार सड़क पर बहता रहता है।लोगों ने विरोध कर प्रशासन को चेताया, ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट मांग रखी कि परिवहन नियमों के तहत हो लेकिन जमीनी हालात में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा। सिर्फ राख ही नहीं कोयला, गिट्टी और बालू से लदे ओवरलोड वाहन भी बिना रोकटोक दौड़ रहे हैं।इसी सप्ताह कोयला और राख परिवहन से जुड़ी दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की जान जा चुकी है लेकिन इसके बावजूद सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही जस की तस बनी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है आखिर कब तक ऐसे ही चलता रहेगा यह मौत का खेल कब जागेगा परिवहन विभाग और कब सड़कों पर चलने वाले आम लोगों को सुरक्षित माहौल मिलेगा।तस्वीरें चेतावनी दे रही हैं। लेकिन जिम्मेदारों की खामोशी इस खतरे को और बढ़ा रही है। वही आरटीओ विभाग अपने मे मस्त है।
