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पीलीभीतः जमीन का खेल या सत्ता का दुरुपयोग?, भाजपा नेताओं पर कब्जा, धोखाधड़ी और दबंगई के सनसनीखेज आरोपः चेक ‘गायब’, सौदा अधूरा३ अब जमीन पर कब्जे की कोशिश! पीड़िता बोली- सत्ता के दम पर कुचलने की साजिश


पीलीभीत। न्यूरिया थाना क्षेत्र में जमीन विवाद का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि स्थानीय राजनीति की परतें भी खोल दी हैं। गांव पथरिया निवासी नंदरानी ने भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, मझोला नगर पंचायत अध्यक्ष निशांत प्रताप सिंह और उनके करीबी राजीव सिंह पर जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर और चैंकाने वाले हैं।पीड़िता का कहना है कि वर्ष 2017 में गांव भिंडारा के पास स्थित जमीन का सौदा 5 लाख 69 हजार रुपये में तय हुआ था। आरोप है कि सौदे के नाम पर 5 लाख रुपये का चेक दिया गया, लेकिन चालाकी ऐसी कि पहले चेक को बैंक में लगाने से मना कर दिया गया। जब समय निकल गया, तो बहाना बनाकर चेक वापस ले लिया गया। 69 हजार रुपये नकद देने की बात कही गई, लेकिन पूरा भुगतान आज तक नहीं हुआ।नंदरानी का आरोप है कि यह पूरा खेल शुरुआत से ही सुनियोजित था पहले भरोसा दिलाकर सौदा किया गया, फिर भुगतान में टालमटोल और अंत में जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश। जब पीड़िता ने विरोध किया, तो मामला सिविल कोर्ट पहुंच गया, लेकिन इसके बावजूद कथित तौर पर दबंगई का खेल जारी है।

महिला ने साफ आरोप लगाया है कि आरोपी पक्ष अब विवादित जमीन पर जबरन निर्माण कराने में जुटा है और उन्हें व उनके परिवार को लगातार धमकाया और प्रताड़ित किया जा रहा है। पीड़िता के मुताबिक, “सत्ता और रसूख के दम पर हमें डराया जा रहा है, ताकि हम अपने हक से पीछे हट जाएं।” इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मामला न्यायालय में लंबित है, तो आखिर किसके इशारे पर जमीन पर निर्माण की कोशिश की जा रही है? क्या कानून से ऊपर हो गए हैं रसूखदार चेहरे? पीड़िता ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है और साफ कहा है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वह सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगी। उनके इस बयान के बाद मामला और गरमा गया है।स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर आम आदमी की जमीन इस तरह छीनी जाएगी और प्रशासन मूकदर्शक बना रहेगा, तो कानून व्यवस्था पर विश्वास कैसे कायम रहेगा? फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह भी सत्ता और प्रभाव के दबाव में दब जाएगा।

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